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Jal hi jivan hai ise aaj nahi bachaoge to aage kab

जल ही जीवन है - इसे आज नहीं बचाओगे तो आगे कब?

जल जीवन के लिए नितांत आवश्यक है। यह कहना गलत नहीं होगा कि 'जल ही जीवन है' क्योंकि हमारे शरीर में 70% जल होता है। जल के बिना किसी भी प्राणी का जीवन इस पृथ्वी पर संभव नहीं है। वैसे तो पृथ्वी पर जल भरपूर मात्रा में उपलब्ध है जैसे कि समुन्दर, महासागर, नदियां इत्यादी परंतु पीने के लिए और अन्य कामों के प्रयोग में किए जाने वाले जल की कमी है। जो जल हम पी सकते हैं और अपने अन्य कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं उसकी मात्रा केवल 3% ही है जो कि हमेंभूमिगत, नदियों, तालाबों और वर्षा के पानी से उपलब्ध होता है। अगर हम पृथ्वी पर जल का वितरण देखें तो हमें पता चलता है कि 1 % जल  झील, नदी, तालाब, कुंओ में मौजूद है और 11% तक भूजल का उपयोग ( सिंचाई व औद्योगिक क्षेत्र में किया जाता है.) हम करते है और शेष 11 % भूजल काफी नीचे के स्तर में है जिनका आने वाले समय में उपयोग किया जा सकता है। दूसरी ओर बाकि 77 % भाग बर्फ के रूप अंटार्कटिक उत्तर दक्षिणी पूर्वी, शीत कटिबंधीय देशी ग्रीनलैंड, आइसलैण्ड, साइबेरिया आदि से प्राप्त होता है। इसलिए हमें जितना हो सके उतना जल का संरक्षण करना चाहिए। 

           हमारे देश में जल संरक्षण को सर्वोपरि रखा जाता है, इसीलिए ही हमारे देश में नदियों को मां का दर्जा दिया गया है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत करनी हो तो हम सबसे पहले पानी का ही इस्तेमाल करते हैं और नदियों को है विसर्जन के लिए इस्तेमाल करते हैं। परंतु पिछले कुछ वर्षों में मानसून की देरी की आने की वजह से वर्षा में कमी देखी गई है जिसकी वजह से भूमिगत जल का अधिक इस्तेमाल हुआ है और जल स्तर नीचे चला गया है। यह समस्या पंजाब, हरियाणा, दक्षिणी राजस्थान, उत्तरी गुजरात व तमिलनाडु के समुद्र तटीय क्षेत्रों में अधिक देखी गई है जहां भूमिगत जल के स्तर में काफी गिरावट दर्ज की गई है। जल संकट से वहां की  मानवता त्रस्त है, जो भविष्य के लिये हानिकारक है। भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन से सदावाहिनी नदियां और तालाब भी सूख रही हैं। 


कृषि में कितने जल का इस्तेमाल होता है?

    केंद्रीय जल आयोग के एक सर्वे के अनुसार यह पाया गया है कि वर्ष 2000 में उपयोग किए गए कुल पानी का 85.3% हिस्सा कृषि के काम में इस्तेमाल में लाया गया था और उनके एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक इस पानी का हिस्सा घटकर 83.3% तक रह जाने की संभावना है। कृषि में पानी का इतना अधिक इस्तेमाल का कारण कृषि में इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक तरीके हैं। कृषि में पानी की समस्या को सुलझाने के लिए केंद्र व राज्य दोनों ही सरकारें किसानों को आधुनिक कृषि के तरीके समझा रही है और उन्हें अपनाने के लिए कुछ लोन भी से रही हैं।

         भारत में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश जहां सिंचाई के लिए नहरों में पानी बहुतायत है तो वहीं हिमालयी नदियों में पानी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है और इससे निचले हिस्से में पानी के प्रवाह में कमी आई है और नदियों के मैदानी इलाकों तक पहुंचते-पहुंचते पानी की कमी में इजाफा हुआ है। जल के अत्यधिक दोहन का समाधान उपलब्ध नहीं है, इसका एक उदाहरण पानी की कमी वाला देश इजराइल है, जहां जलवायु परिवर्तन की विकट परिस्थितियां होते हुए भी आज वहां आवश्यकता से अधिक पानी मौजूद है। आज, इजराइल के 80% अपशिष्ट जल को खेतीबाड़ी के काम में लाने के लिए रीसाइकल्ड किया जाता है। 


वैश्विक स्तर पर संरक्षण का महत्व: पानी में आने वाली कमी को दूर करने के लिए और लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाने के लिएहर साल 22 मार्च को विश्व जल संरक्षण दिवस के रूप में मनाया तो जाता है। परंतु दुर्भाग्यवश आज भी लोग जल संरक्षण को लेकर उतने सचेत नहीं जितने की उन्हें होना चाहिए। 


विश्व संरक्षण दिवस की शुरुआत कैसे हुई?


          जल हमारे जीवन व्यतीत करने के लिए एक बुनियादी आवश्यकता है परन्तु दुर्भाग्यवश इसके बावजूद हम लोग पानी को व्यर्थ करते हैं जिससे कि हमें पता चलता है कि लोग अब भी पूर्ण रूप से जल के महत्व को समझ नहीं पाए हैं। हर साल जल संरक्षण दिवस को न जाने कितने ही पानी बचाओ अभियानों का आयोजन किया जाता है लेकिन कुछ समय बाद लोग इन्हीं अभियानों से कट जाते हैं। 


  • सबसे पहले 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की अनुसूची 21 में इसे आधिकारिक रूप से शामिल किया गया था। इसके बाद बाद 1993 से ही इसे एक उत्सव के तौर पर मनाया जाने लगा है।


  • विश्व जल संरक्षण दिवस मनाने की शुरुआत  साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा ने की थी जहां इस सभा में 22 मार्च को विश्व संरक्षण दिवस के रूप मनाए जाने की घोषणा की गई थी। इस दिन अनेक कार्यक्रम किए जाने की घोषणा की गई थी जिसका प्रमुख उद्देश्य समाज में जल की आवश्यकता, उसके महत्व और संरक्षण के प्रति जागरुकता पैदा करना था।


किसान संरक्षण में कैसे सहयोग कर सकते हैं?


     अधिकतर किसान कृषि के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें कि सिंचाई में अधिक पानी व्यर्थ होता है। आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि सिंचाई के आधुनिक तरीके विकसित किए जा चुके हैं। किसान सिंचाई के लिए आधुनिक तरीकों को अपनाकर कृषि में होने वाले व्यर्थ पानी को कम कम कर सकते हैं। सिंचाई प्रणाली में बदलाव एक महंगा क़दम है परन्तु साथ ही साथ ड्रिप सिंचाई से  50 -60 प्रतिशत पानी की बचत होती है और 35-40 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि एवं उपज के गुणवत्ता में सुधार सम्भव है। इस विधि से सिंचाई करने से पानी बर्बाद किये बिना पौधों की जड़ तक पानी पहुंचाया जा सकता है।


सामान्य नागरिक जल संरक्षण कैसे कर सकते हैं?


  • एक सर्वे में पाया गया है कि लोग गर्मियों में दो से तीन बार नहाते हैं और दो बाल्टी पानी का इस्तेमाल करते हैं। यह सीधा पानी का व्यर्थ है। ऐसे में लोगों को दिन में एक बार ही नहाना चाहिए और सिर्फ एक बाल्टी पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

  • कुछ व्यक्तियों की आदत होती है कि को मंजन करते समय नल को खुला छोड़ देते हैं, ऐसे में अधिक पानी व्यर्थ होता है। ऐसे लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि कम से कम मंजन करते समय वो नल को बंद रखें।

  • अगर कम कपड़े धोने हैं तो लोग वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल ना करें क्योंकि इसमें कम कपड़ों में अधिक पानी व्यर्थ होता है। 

  • लोगों को वर्षा जल संग्रहण करना चाहिए। वे उस जल का उपयोग गाड़ी धोने, कपड़े धोने, पेड़ पोधों को पानी देने में इस्तेमाल कर सकते हैं

  • लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। साथ ही साथ लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि वे कोई भी कागज या पॉलिथीन किसी नाले में न डालें।

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जल जीवन है इस बात को समझाने की जरुरत शायद हमें तो नहीं है इस बात की जरूरत को आप स्वयं भी बहुत अच्छी तरीके से समझते होंगे तो इसके लिए आप क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं? क्या आपने यह बात सोची है?  अगर नहीं सोची है तो आज ही सोचिए और जुड़े हमारे साथ क्योंकि हम जल बचाओ के सभी प्रकार के कार्यक्रम में आगे बढ़कर भारत देश को सहयोग देते हैं। मुस्कान फॉर ऑल में आप बतौर वालंटियर और बतौर सदस्य जोड़कर अपना महत्वपूर्ण योगदान हमें दे सकते हैं और देशोन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।