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समाज में बेटी का स्थान

समाज में बेटी का स्थान

आजकल 'भारत में महिलाओं की स्थिति’ एक बहुत ही चर्चित विषय है जो विद्यार्थियों को अक्सर अपने स्कूल में अनुच्छेद लिखने या निबंध लिखने के लिए मिल जाता है। हमने यहाँ पर स्कूली विद्यार्थियों के लिए अलग अलग शब्द सीमा में कुछ निबंध उपलब्ध करवाए है जो उन्हें अपनी निबंध लेखन प्रतियोगिता में सहायता कर सकते है। अपनी जरुरत के अनुसार आप इनमें से जिस शब्द सीमा का निबंध चाहे वो चुन सकते है।

भारत के आज़ाद होने के बाद महिलाओं की दशा में काफी सुधार हुआ है। महिलाओं को अब पुरुषों के समान अधिकार मिलने लगे है। महिलाएं अब वे सब काम आज़ादी से कर सकती है जिन्हें वे पहले करने में अपने आप को असमर्थ महसूस करती थी। आज़ादी के बाद बने भारत के संविधान में महिलाओं को वे सब लाभ, अधिकार, काम करने की स्वतंत्रता दी गयी है जिसका आनंद पहले सिर्फ पुरुष ही उठाते थे। वर्षों से अपने साथ होते बुरे सुलूक के बावजूद महिलाएं आज अपने आप को सामाजिक बेड़ियों से मुक्त पाकर और भी ज्यादा आत्मविश्वास से अपने परिवार, समाज तथा देश के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

नारी शक्ति का सवरूप :

नारी शक्ति एक ऐसी है जो सारे देश को , सारे समाज को - कभी एक माँ के रूप में , कभी बहन के रूप में ,कभी पत्नी के रूप में , तो कभी बेटी के रूप एकता के सूत्र  में बांधती है।

देश का भविष्य एक नारी  पर निर्भर करता है। वह जिस तरह से अपने बच्चों को शिक्षा देती है वह बच्चे आगे बढ़ कर देश का भविष्य बनते है। आज की नारिओं ने सिद्ध के दिया है कि अगर उन्हें पर्याप्त मोककका और स्वतंत्रता दी जाये तो वह देश का और  खुद उन्नति के मार्ग पर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

भारतीय समाज में नारी का स्थान :

  • प्राचीन काल में हमारे समाज में नारी का महत्व नर से कहीं बढ़कर होता था। किसी समय तो नारी का स्थान नर से इतना बढ़ गया था कि पिता के नाम के स्थान पर माता का ही नाम प्रधान होकर परिचय का सूत्र बन गया था।
  • समय के साथ धीरे-धीरे महिलाओं की स्थिति में कुछ असामान्य परिवर्तन हुए। अगर आदमी ने परिवार का ख्याल रखा, तो घर के अंदर की सारी गतिविधियों का बोझ उठाने लगा। इस तरह, पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत अंतर आ गया। ऐसा होने पर भी, प्राचीन काल की नारी ने अपनी हीन भावना को त्याग दिया है और स्वतंत्र और आत्मविश्वास होकर और एक सुंदर और आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण किया है।
  • समाज में महिलाओं की संख्या को बराबर करने के लिये, लोगों को बड़े स्तर पर बेटी बचाओ योजना के बारे में जागरुक करने की आवश्यकता है। भारत की सरकार ने लड़कियों को बचाने के संदर्भ में कुछ सकारात्मक कदम उठाये है जैसे: महिलाओं की घरेलू हिंसा से सुरक्षा अधिनियम 2005, कन्या भ्रूण हत्या पर प्रतिबंध, अनैतिक रोकथाम, अधिनियम, उचित शिक्षा आदि।

महिलाओं की समाज में भूमिका :

पौराणिक समाज में महिलाओं को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता था, लेकिन यह भी सच है कि आज स्थिति बिल्कुल अलग है। उनके साथ अविवाहित व्यवहार किया जाता है।जब तक उसकी स्थिति को सुधारने का प्रयास नहीं किया जाता, तब तक उसे उच्च हृदय वाली देवी के रूप में स्वीकार करना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं के लिए प्रगति करना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि पुरुष आगे आएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।

हम सब की ज़िंदगी में महिलाओं का बहुत अहम किरदार है। उनके बिना हम अपने अस्तित्व की कल्पना भी नहीं कर सकते। जीवन में एक स्थिरता बनाए रखने के लिए, परिस्थितियाँ महत्वपूर्ण हैं। पहले उन्हें सिर्फ इसी लायक समझ जाता था की वे घर का काम करे, झाड़ू-पोछा लगाए, खाने पीने का ध्यान रखे पर अब ऐसा नहीं है। परन्तु अब महिलाएं घर के कामकाज के साथ साथ बाहरी दुनिया में भी अपनी प्रतिभा दिखा रही है।

उपसंहार :

समय के बदलते नारी दशा में अब बहुत परिवर्तन आ गया है। यों तो नारी को प्राचीन काल से अब तक भार्या के रूप में रही है। इसके लिए उसे गृहस्थी के मुख्य कार्यों में विवश किया गया, जैसे- भोजन बनाना, बाल बच्चों की देखभाल करना, पति की सेवा करना। पति की हर भूख को शांत करने के लिए विवश होती हुई अमानवता का शिकार बनकर क्रय विक्रय की वस्तु भी बन जाना भी अब नारी जीवन का एक विशेष अंग बन गया।

मुस्कान एनजीओ द्वारा संदेश दिया जाता है कि दुनिया में सभी लड़कियों के विकास के लिए हमे अपने विचारों में बदलाव लाना चाहिए , खासतौर पर पुरुष अगर अपनी मानसिकता में बदलाव लाकर महिलाओं का साथ देना चाहिए और उन्हें जागरूक करे। उन्हें अपनी बराबरी में देखने का साहस कर सकें,तो हमारे देश की उन्नति और विकास सुनिश्चित है।