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Tayoharo par jal sangrachan kare jal vayrth na kare

त्योहारों पर जल संरक्षण करें, जल व्यर्थ ना करें ...

 जल पृथ्वी पर ईश्वर का  मनुष्यों को दिया जाने वाला अनमोल उपहार है।  जल अगर पृथ्वी पर उपलब्ध है तो ही जीवन मौजूद है अन्यथा जीवन बेहद ही बेस्वाद और रंगहीन होगा। जल पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों के जीवन में स्वाद, रंग और अच्छी गंध जोड़ता है। यह हमसे कुछ नहीं लेता बल्कि हमें जीवन देता है।  इसका कोई आकार नहीं है, लेकिन हम इसे स्टोर करने वाले कंटेनर का आकार लेते हैं। हमें यह हर जगह नदियों, समुद्रों, टैंकों, कुओं, तालाबों आदि में मिलता है, लेकिन हमारे पास पीने के साफ पानी की कमी है।  

 

जैसे कि हम सभी जानते हैं कि त्योहारों के समय साफ-सफाई को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है। धर्म चाहे कोई भी हो प्रत्येक त्योहार मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में मुख्य तौर पर हलवाई भारी मात्रा में पानी व्यर्थ करते हैं। अधिक मिठाई बनाने के होड़ में हलवाई अपने बर्तनों को धोने में अधिक पानी व्यर्थ करते हैं। एक तो पहले से ही पानी की समस्या इतनी गहरी है और ऊपर से पानी का इतना अत्यधिक व्यर्थ, पानी की कमी को और बढ़ा रहा है। 


स्वच्छ जल का महत्व:

जल के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। इसलिए यह कहा गया है कि "जल ही जीवन है"।  मानव, पशु, पौधे आदि सभी जीवित प्राणियों को विकसित होने और जीने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। पानी यहाँ सभी के जीवन का एकमात्र स्रोत है। हमें जीवन के सभी क्षेत्रों में सुबह से लेकर रात तक पीने, खाना बनाने, नहाने, कपड़े धोने, पौधों को पानी देने आदि में आवश्यकता होती है।

विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए पानी की आवश्यकता होती है जैसे कि किसानों को फसल उगाने के लिए पानी की जरूरत होती है, बागवानों को पानी के पौधे, उद्योग के काम के लिए उद्योगपति, पनबिजली पैदा करने के लिए बिजली संयंत्र आदि। हमारी आने वाली पीढ़ियों और पानी और वन्य जीवों के स्वस्थ जीवन के लिए।  दुनिया के कई स्थानों पर लोग पानी की कमी या अपने क्षेत्रों में पूरी तरह से पानी की कमी से पीड़ित हैं।

हमारी पृथ्वी को नीले ग्रह के नाम से जाना जाता है और हमारे इस नीले ग्रह पर जल की ही कमी है तो अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। हमें अपने दैनिक कार्यों के लिए इसकी आवश्यकता होती है और हम इसका उपयोग करते हैं लेकिन अनुचित तरीके से जब तक हम सोचते हैं कि पानी अंतहीन है। हम सभी को यह नहीं पता था कि 70% पानी केवल पानी की थोड़ी मात्रा पीने योग्य है और सबसे ज्यादा नमकीन पानी है जिसे हम नहीं पी सकते। नदी और सरोवर जल के प्रमुख कारक हैं और अभी इनमें प्रदूषकों की वृद्धि हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोग नदी में कपड़े धोते हैं, नदी के पानी में स्नान भी करते हैं और अब ये सभी कारक जलस्रोतों के लिए प्रदूषक बन गए हैं। 


स्वच्छ जल की कमी:

वैसे तो पृथ्वी पर जल भरपूर मात्रा में उपलब्ध है जैसे कि समुन्दर, महासागर, नदियां इत्यादी परंतु पीने के लिए और अन्य कामों के प्रयोग में किए जाने वाले जल की कमी है। जो जल हम पी सकते हैं और अपने अन्य कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं उसकी मात्रा केवल 3% ही है जो कि हमेंभूमिगत, नदियों, तालाबों और वर्षा के पानी से उपलब्ध होता है। अगर हम पृथ्वी पर जल का वितरण देखें तो हमें पता चलता है कि 1 % जल  झील, नदी, तालाब, कुंओ में मौजूद है और 11% तक भूजल का उपयोग ( सिंचाई व औद्योगिक क्षेत्र में किया जाता है.) हम करते है और शेष 11 % भूजल काफी नीचे के स्तर में है जिनका आने वाले समय में उपयोग किया जा सकता है। दूसरी ओर बाकि 77 % भाग बर्फ के रूप अंटार्कटिक उत्तर दक्षिणी पूर्वी, शीत कटिबंधीय देशी ग्रीनलैंड, आइसलैण्ड, साइबेरिया आदि से प्राप्त होता है। इसलिए हमें जितना हो सके उतना जल का संरक्षण करना चाहिए। 


कृषि में जल का उपयोग:

केंद्रीय जल आयोग के एक सर्वे के अनुसार यह पाया गया है कि वर्ष 2000 में उपयोग किए गए कुल पानी का 85.3% हिस्सा कृषि के काम में इस्तेमाल में लाया गया था और उनके एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक इस पानी का हिस्सा घटकर 83.3% तक रह जाने की संभावना है। कृषि में पानी का इतना अधिक इस्तेमाल का कारण कृषि में इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक तरीके हैं। कृषि में पानी की समस्या को सुलझाने के लिए केंद्र व राज्य दोनों ही सरकारें किसानों को आधुनिक कृषि के तरीके समझा रही है और उन्हें अपनाने के लिए कुछ लोन भी से रही हैं।


सामान्य मनुष्य कैसे जल संरक्षण कर सकते हैं?

कुछ लोग गर्मियों में दो से तीन बार नहाते हैं और दो या उससे अधिक बाल्टी पानी का इस्तेमाल करते हैं। यह सीधा पानी का व्यर्थ है। ऐसे में लोगों को दिन में एक बार ही नहाना चाहिए और सिर्फ एक बाल्टी पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए। अगर कम कपड़े धोने हैं तो लोग वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल ना करें क्योंकि इसमें कम कपड़ों में अधिक पानी व्यर्थ होता है। कुछ व्यक्तियों की आदत होती है कि को मंजन करते समय नल को खुला छोड़ देते हैं, ऐसे में अधिक पानी व्यर्थ होता है। ऐसे लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि कम से कम मंजन करते समय वो नल को बंद रखें। लोगों को वर्षा जल संग्रहण करना चाहिए। वे उस जल का उपयोग गाड़ी धोने, कपड़े धोने, पेड़ पोधों को पानी देने में इस्तेमाल कर सकते हैं। लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। 

कृषि में जल कैसे संरक्षण करें: अधिकतर किसान कृषि के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें कि सिंचाई में अधिक पानी व्यर्थ होता है। आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि सिंचाई के आधुनिक तरीके विकसित किए जा चुके हैं। किसान सिंचाई के लिए आधुनिक तरीकों को अपनाकर कृषि में होने वाले व्यर्थ पानी को कम कम कर सकते हैं। सिंचाई प्रणाली में बदलाव एक महंगा क़दम है परन्तु साथ ही साथ ड्रिप सिंचाई से  50 -60 प्रतिशत पानी की बचत होती है और 35-40 प्रतिशत अधिक उत्पादन होता है।


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