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AAJ KE SAMAY ME BETIYO KA KYA ASTHAN HAI ?

Aaj Ke Samay Me Betiyo Ka Kya Asthan Hai

AAJ KE SAMAY ME BETIYO KA KYA ASTHAN HAI ?

आज के समय में बेटीओं का क्या स्थान है?
पृथ्वी पर मानव जाति का अस्तित्व, आदमी और औरत दोनों की समान भागीदारी के बिना संभव नहीं होता है। दोनों ही पृथ्वी पर मानव जाति के अस्तित्व के साथ-साथ किसी भी देश के विकास के लिए समान रूप से जिम्मेदार है। सबसे बड़ा अपराध कन्या भ्रूण हत्या है जिसमें अल्ट्रासाउंड के माध्यम से लिंग परीक्षण के बाद लड़कियों को माँ के गर्भ में ही मार दिया जाता है।

बेटियां समाज व राष्ट्र की अमूल्य धरोहर एवं जननी हैं। समाज में बेटियों का विशेष स्थान है। एक सुसंस्कृत एवं संस्कार वान समाज व राष्ट्र के निर्माण के लिए बेटियों को पढ़ाना व उनकी सुरक्षा करना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है। बेटियों के बिना समाज व पुरुष का अस्तित्व नहीं है।

हमारा भारत देश पौराणिक संस्कृति के साथ-साथ महिलाओं के सम्मान और इज़्ज़त के लिए जाना जाता था।  लेकिन बदलते समय के अनुसार हमारे देश के लोगों की सोच में भी बदलाव आ गया है। जिसके कारण अब बेटियों और महिलाओं के साथ हैं एक समान व्यवहार नहीं किया जाता है।

लोगों की सोच किस कदर बदल गई है कि आए दिन देश में कन्या भ्रूण हत्या और बलात्कार जैसे मामले देखने को मिलते रहते हैं। जिसके कारण हमारे देश की सभी इतनी खराब हो गई है कि दूसरे देश के लोग हमारे भारत देश में आने से झिझकते हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ जागरूकता अभियान
बेटी बचाओ बेटी पढाओ एक ऐसी योजना है जिसका अर्थ होता है कन्या शिशु को बचाओ और इन्हें शिक्षित करो। इस योजना को भारतीय सरकार के द्वारा 22 जनवरी , 2015 को कन्या शिशु के लिए जागरूकता का निर्माण करने के लिए और महिला कल्याण में सुधार करने के लिए शुरू किया गया था।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की आवश्यकता : बेटी किसी भी क्षेत्र में लड़कों की तुलना में कम सक्षम नहीं होती है और लड़कियाँ लडकों की अपेक्षा अधिक आज्ञाकारी , कम हिंसक और अभिमानी साबित होती हैं। लड़कियाँ अपने माता-पिता की और उनके कार्यों की अधिक परवाह करने वाली होती हैं। एक महिला अपने जीवन में माता , पत्नी , बेटी , बहन की भूमिका निभाती है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ का उद्देश्य : इस मिशन का मूल उद्देश्य समाज में पनपते लिंग असंतुलन को नियंत्रित करना है। इस अभियान के द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध आवाज़ उठाई गयी है। यह अभियान हमारे घर की बहु-बेटियों पर होने वाले अत्याचार के विरुद्ध एक संघर्ष है। इस अभियान के द्वारा समाज में लड़कियों को समान अधिकार दिलाए जा सकते हैं।

उपसंहार :
मुस्कान एनजीओ संदेश देते है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को कन्या भ्रूण हत्या को ख़त्म करना चाहिए। उनके द्वारा योजना के माध्यम से  इस बात पर जोर दिया कि बेटियों के साथ जो भी भेदभाव हो रहे हैं उनको खत्म किया जाए और साथ ही उनको पढ़ने लिखने की भी आज़ादी दी जाए। बेटियों को भी अपना जीवन जीने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए। बेटी को बचाने के साथ-साथ इनका समाज में स्तर सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए। लड़कियों को उनके माता-पिता द्वारा लड़कों के समान समझा जाना चाहिए और उन्हें सभी कार्य क्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करने चाहिए।