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BHARAT ME MAHILA SASHAKTIKARAN KYU JARURI HAI ?

Bharat Me Mahila Sashaktikaran Kyu Jaruri Hai

BHARAT ME MAHILA SASHAKTIKARAN KYU JARURI HAI ?

भारत में महिला सशक्तिकरण क्यों जरूरी हैं?
हमारा देश एक पुरुषप्रधान देश हैं जिसमें पुरुष को हर क्षेत्र में महत्व दिया जाता हैं परन्तु महिलाओं पर हर तरह की पाबंदीयाँ लगाई जाती हैं, आज भी महिलाओं को ज्यादा बाहर नहीं निकलने दिया जाता, उन्हें सिर्फ घर-परिवार तक ही सीमित रखा जाता हैं! हमारे देश की 50 प्रतिशत आबादी केवल महिलाओं की हैं जो अभी तक सशक्त नहीं हैं और इन्हे कई सामाजिक प्रतिबंधों से बाँधा हुआ हैं! हमें इस आबादी को खत्म करने की जरूरत हैं जिससे पूरे देश का विकास हो सके! अपने देश को विकसित करने के लिए जरूरी हैं कि सरकार, पुरुष और स्वयं महिलाएं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दें!

अपनी निजी स्वतंत्रता व खुद फैसले लेने के लिए महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण हैं! हमारे देश को महिला सशक्तिकरण की जरूरत इसीलिए पड़ी क्योकि पहले के समय में भारत पुरुषप्रधान समाज था! महिलाओं को उनके परिवार व समाज द्वारा दबाया जाता था और पुरुष और महिलाओं में भेदभाव भी किया जाता था ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि कई दूसरे देशों में भी दिखाई देता था! आज भारत के समाज में महिलाओं को देवियों के रूप में पूजा जाता हैं परन्तु केवल पूजने से देश का विकास नहीं होगा! जरूरत है तो देश की हर महिला का हर क्षेत्र में सशक्तिकरण किया जाए जो देश के विकास करने में मदद करेगी!

पहले के समय में महिलाओं को पढ़ने नहीं दिया जाता था और न ही उन्हें रोजगार करने दिया जाता, उन्हें सिर्फ घर की ही चार दीवारों में बंद रहना पड़ता था, कभी मंगलसूत्र के बंधन में बंधकर पत्नी के के रूप में, कभी ममता के बंधन में बंधकर माँ के रूप में आदि! परन्तु महिला सशक्तिकरण के बाद से देश में बहुत सुधार आया है! महिलाएं शिक्षित होने लगी हैं, हर क्षेत्र में हिस्सा लेने लगी हैं, रोजगार प्राप्त करने के लिए नौकरी भी करने लगी हैं! परन्तु इन सब तक ही सीमित नहीं हैं, आज भी महिलाओं का शोषण किया जाता हैं जैसे कि जन्म से पहले ही कन्या भ्रूण हत्या, दहेज के लिए लड़की की हत्या कर देना, रेप की घटनाये बढ़ना आदि! भारत सरकार ने पुरुष और महिला को सामान अधिकार दिया हैं, कई योजनाएं भी शुरू की हैं, परन्तु फिर भी महिला और पुरुष में भेदभाव किया जाता हैं, जो महिलाओं के लिए अन्याय ही तो हैं!

महिला सशक्तिकरण तब तक संभव नहीं यही जब तक कि हमारे समाज के पुरुष अपनी सोच में परिवर्तन नहीं लाते और यह सोच ले कि महिलाएं भी पुरुष से कम नहीं हैं! और महिलाओं को भी अपने अधिकारों के लिए आगे बढ़ना होगा! अपनी कार्यक्षमता से अपनी शक्ति का और खुद को सशक्त होने का परिचय देना होगा! महिलाओं को भी दिखाना होगा की वह लाचार नहीं हैं उन्हें लाचार बनाया गया हैं और वह भी समाज का एक अहम हिस्सा हैं! उनका भी उतना ही महत्व है जितना की पुरुषों का! हमारे समाज का संतुलित विकास महिला के सशक्त होने पर ही निर्भर हैं!

हालांकि कई वर्षों से महिलाओं के साथ होने वाले अपराध और बुरी प्रथाओं को हटाने के लिए सरकार ने कई अधिकार और कानून बनाये और लागू किये हैं! इन अभी को बनाये रखने के लिए महिलाओं के साथ सभी का सहयोग बहुत जरूरी हैं! आज के समय में तो महिलाओं के अधिकारों को लेकर लोग ज्यादा जागरूक होने लग गए है और मुस्कान एनजीओ भी इस काम में बहुत मदद कर रही हैं!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ द्वारा समाज को यह बताया जाता हैं कि  भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण लाने के लिये महिलाओं के खिलाफ बुरी प्रथाओं के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें हटाना होगा जो कि समाज की पुरुष प्रभाव युक्त व्यवस्था है। जरुरत है कि हम महिलाओं के खिलाफ पुरानी सोच को बदलना होगा और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लाना होगा! ताकि महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार मिल सके!