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DAHEJ PARATHA EK SAMAJIK APARADH KAISE HAI ?

Dahej Paratha Ek Samajik Aparadh Kaise Hai

DAHEJ PARATHA EK SAMAJIK APARADH KAISE HAI ?

दहेज प्रथा एक समाजिक अभिशाप कैसे हैं?
हमारे देश में दहेज प्रथा एक सामाजिक बुराइयों में से एक हैं! आजकल हर दिन दहेज के कारण हो रही आत्महत्या के समाचार सुनने को मिल रहे हैं! इसी दहेज के चलते कितने माता-पिता से उनकी बेटियां छीन गई हैं! हमारे देश में भ्र्ष्टाचार ही दहेज प्रथा एक मुख्य कारण हैं! लोगों द्वारा गैरकानूनी तरीके से धन को जोड़ा जाता हैं, क्योकि उन्हें अपनी लड़कियों की शादी में दहेज पर भारी खर्च करना पड़ता हैं! यह बुराई ही समाज को खोखला कर रही हैं! दहेज प्रथा भारतीय समाज में आज की ही नहीं चल रही यह तो भूतकाल से चलती आ रही हैं! यह प्रथा हमारे समाज में ही नहीं बल्कि किसी न किसी रूप में विदेशों में भी प्रचलित हैं! दूसरे शहरों में नवविवाहित जोड़े को उपहार और भेंट दिए जाते हैं! यह प्रथा सभी अधिकतर सभी समाजों में प्रचलित हैं!

भारतीय समाज में इस प्रचलन का मुख्य कारण महिलाओं की पुरुषों पर निर्भरता हैं, अधिकतर पत्नियां अपना जीवन जीने के लिए पूरी तरह से अपने पति पर ही निर्भर रहती हैं तथा पति इसकी कीमत अपनी पत्नी के मात-पिता से मांगते हैं और महिलाओं को निम्न स्तर का दर्जा भी दिया जाता हैं! परिवार में दोनों की हिस्सेदारी एक दूसरे के पूरक होती हैं फिर भी लड़कों को ही हमेशा ज्यादा महत्व दिया जाता हैं! हमारे समाज में लड़की के माता-पिता को अपनी लड़की का विवाह एक विशेष आयु में एक उपयुक्त लड़के के साथ करना होता हैं! उन्हें डर रहता है कि लड़की एक विशेष आयु निकल जाने पर उसकी किसी अच्छे लड़के से शादी नहीं होगी! लड़के वाले लड़की वालों की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हैं!

दहेज का एक अन्य कारण भारतीय समाज में कठोर जाति प्रथा हैं! माता-पिता को अपनी लड़की का विवाह अपनी ही जाति में करना होता हैं! जिससे लड़के को चुनने में थोड़ी परेशानी होती हैं! इन रिवाजों को तोड़ने की हिम्मत साधारण लोगों में नहीं हैं और न समाज इसके लिए स्वीकृति देता हैं! इसके  हैसियत से ऊँचे परिवार में विवाह करना भी दहेज प्रथा का एक मुख्य कारण हैं!

यदि हमने अपने समाज की प्रगति करनी हैं और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना हैं तो हमें दहेज प्रथा को खत्म करना होगा! महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही सही शिक्षा देनी की आवश्यकता हैं! विज्ञापन के द्वारा इस बुराई का अंत किया जाना चाहिए, दहेज के विरुद्ध बनाये गए नियमों को और अधिक सख्त बनाये जाने चाहिए और उन्हें लागू भी करने चाहिए! दोषियों को ऐसे दंड देने चाहिए ताकि वह भविष्य में ऐसी गलती दुबारा करने की हिम्मत भी न कर सके और लोगों के मन में लिंग की समानता के तथ्यों को जोरदार तरीके से अवगत कराया जाना चाहिए!

आज के समय में महिलाओं ने यह साबित कर दिया हैं कि महिलाएं भी पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं! कई तो अपने परिवार वालों के लिए रोजी रोटी भी कमा रही हैं, अपने बूढ़े माँ-बाप की सेवा कर रही हैं! पहले के समय में केवल लड़का ही अपने माता-पिता की सेवा करता था परन्तु ज़माना बदल गया हैं लड़कियां भी अपने माता पिता की सेवा करती हैं!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ की टीम ने दहेज प्रथा के इस सामाजिक अभिशाप को खत्म करने लिए कदम उठाये हैं और लोग भी इनके द्वारा बहुत प्रेरित हुए हैं! लोगों ने भी इस टीम के साथ मिलकर दहेज न लेने और न देने की कसम उठाई हैं! और इसके लिए कई कार्यक्रम भी चलाये गए हैं ताकि समाज के और लोग भी इसकी तरफ प्रेरित हो सके! इसके लिए बहुत से नियम बनाए गए हैं और उन्हें लागू भी किए गए हैं!