No One Has Ever Become Poor By Giving!

  • Phone:+91 9953659128
  • Email: info@muskanforall.com
Franchise Volunteer Donate Us

DAHEJ PARATHA KA VIRODH KYU HONA CHAHIYE ?

Dahej Paratha Ka Virodh Kyu Hona Chahiye

DAHEJ PARATHA KA VIRODH KYU HONA CHAHIYE ?

दहेज की प्रथा का विरोध क्यों होना चाहिए ?
आज के समय की दहेज प्रथा बहुत बड़ी समस्या बन चुकी हैं, सभी लोग इस समस्या से परेशान हैं! आज हर परिवार में लड़के और लड़कियां हैं, परन्तु लड़की के मामले  में लोग दहेज देने से हिचकिचाते हैं परन्तु वही लड़के की शादी में लोग दहेज सामने से मांगते हैं! वे लोग यह भूल जाते हैं कि उन्हें लड़की के समय दहेज देने में कितनी समस्या हुई थी! लड़के और लड़की की शादी के बारे में यह अलग-अलग सोच रखना बहुत ही गलत हैं!

दहेज के मामले में वर-पक्ष और कन्या-पक्ष दोनों ही दोषी होते हैं! परन्तु वर-पक्ष का दोषी होना ज्यादा माना जाता हैं! लड़के वाले लड़की वालों से दहेज चाहते हैं, उनसे बढ़िया कपड़े, कीमती जेवरात, ठाठ से बारात, बाजे, आतिशबाजी चाहते हैं! परन्तु यह बिल्कुल गलत हैं, इन सब में कन्या पक्ष वालों को बहुत सी राशि जुटानी पड़ती हैं! जो उनके लिए बहुत ही मुश्किल होती हैं! कन्या के पिता कर्जा लेकर अपनी बेटी की शादी करते हैं ताकि उन्हें ससुराल में उन्हें किसी तरह के ताने न सुनने पड़े! और उन्हें वहां सम्मान मिल सके! परन्तु इतना सब करने के बाद भी ससुराल वाले लड़की को तंग करना नहीं छोड़ते! लड़के वालों को इतना देने के बाद भी वह मांगने से पीछे नहीं हटते! इसीलिए दहेज को रोकना बहुत जरूरी हैं!

दहेज के नाम पर लड़के वालों को मिठाई, नकद राशि के साथ बर्तन, कपड़े, जेवर और फर्नीचर आदि भी दिए जाते हैं! यही सामान लड़के वालों के घर बेकार पड़ा रहता हैं, उनका कोई इस्तेमाल नहीं करता! क्योकि जीवनोपयोगी की वस्तुएं तो लोगो के घरों में होती हैं! और यही नई चीजों पर लड़की वालों का कितना ही पैसा क्यों न लगा हो परन्तु यही सब लिया जाता हैं और इसकी कुछ विशेष उपयोगिता भी नहीं होती! इसी तरह बरसों से कमाया हुआ पैसा ऐसे ही बर्बाद हो जाता हैं!

दहेज प्रथा सामजिक, आर्थिक और नैतिक तीनो रूप से हानिकारण होती हैं! दहेज के कारण गरीब घर की कन्याएं अमीर घरों में नहीं जा सकती! जिस पिता के पास ज्यादा कन्याएं होती हैं, वह बहुत परिश्रम से धन कमाने की कोशिश करता हैं, जिससे उसका जीवन बहुत ही दुखमय बन जाता हैं! इस पर भी अगर धन जुटाने में सफलता नहीं मिलती तो सुयोग्य कन्या का अयोग्य वर के साथ विवाह कर दिया जाता हैं! जिससे उन्हें अशांत और असंतुष्ट जीवन बिताना पड़ता हैं!

इस कुप्रथा के विरुद्ध कई उपाय किए जाने चाहिए जो कि इस प्रकार हैं;

1) दहेज के मामलों में अधिक दोष लड़के वालों का होता हैं इन्हे हटाने के विशेष प्रयत्न किये जाने चाहिए, लड़के वालों को चाहिए की वह दहेज लेने से मना कर दे!

2) लड़के वाले लड़की वालों के उन खर्चों को कम कराए, जिन्हे कम कराया जा सकता हैं!

3) विकासशील और उदार बनकर अभिभावकों को स्पष्ट कह दें कि अगर उन्होंने दहेज लिया तो वे विवाह नहीं करेंगे!

4) उपजातियों के बंधन को खत्म कर देना चाहिए!

5) कन्याओं को  शिक्षा की और अग्रसर कराना चाहिए ताकि  विवाह के समय दहेज देने की नौबत ही न आये!

6) सरकार को कानून बनाकर दहेज लेने और देने को दंडनीय घोषित कर देना चाहिए!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ संदेश देते है कि सरकार को दहेज के विरोधी कानून का सख्ती से पालन कराया जाए एवं अपराधी को सख्त सज़ा देने की व्यवस्था की जानी चाहिए । इस प्रकार धनवानों को गरीबों का मज़ाक उड़ाने से रोका जा सकता है। वह समाज में कन्या शिक्षा पर माता – पिता अधिक ध्यान देनी चाहिए और उन्हें आत्म-निर्भर व अपने पैरों पर खड़े होने योग्य बनाने की प्रेरणा लेनी चाहिए। जहाँ दहेज लेने व देने के भी समाचार मिलें वहाँ युवा वर्ग पिकेटिंग का मार्ग ग्रहण करें!