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DAHEJ PARATHA KE ROK THAM KE UPAY

Dahej Paratha Ke Rok  Tham Ke Upay

DAHEJ PARATHA KE ROK THAM KE UPAY

दहेज प्रथा की रोकथाम के उपाय
आज के समय में दहेज प्रथा एक कुरुति बन चुकी हैं जिसमे विवाह की समय एक शर्त पर लड़की के परिवार वालों द्वारा लड़के वालों को विवाह से पहले या बाद में जरूर देना पड़ता हैं! वैसे दहेज की बजाय इसे लड़के को खरीदना कहना ज्यादा सही होगा! क्योकि वैसे भी अब दहेज प्रथा एक सौदेबाजी ही बन कर रह गई है! दहेज की राशि और सामान भी निर्धारित होने लगा हैं! लड़की वालों को लड़के वालों की मांग के अनुसार ही दहेज देना पड़ता हैं! दहेज के रूप में कार, टीवी, ऐसी आदि के साथ-साथ नकद भी माँगा जाता हैं! आज लड़कों का विवाह करना सौदा बन गया हैं! इसकी रोकथाम के उपाय निम्न हैं;

1) दहेज प्रथा के उन्मूलन के लिए देश के युवा वर्ग को जागरूक होना अति आवश्यक हैं! जो लोग पुराने रीति – रिवाजों में विश्वास रखते हैं उन लोगों की प्रवृति में आमूल-चूक परिवर्तन होना असम्भव ही हैं! इसके लिए हमें शिक्षित युवक-युवतियों को आगे लाने के लिए दृढ़ निश्चय करना होगा!

2)
इस स्थिति में सामाजिक क्रान्ति का आह्वान किया जाना चाहिए जिसका नेतृत्व भी युवा वर्ग के हाथों में ही हो! सभी गांव और शहरों में दहेज उन्मूलन कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए और जो लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं, और रूढिवादी प्रवृत्ति के व्यक्ति है उन्हें दहेज के दुष्परिणामों के व्यापक रूप से परिचित करना चाहिए!

3)
दहेज के विरुद्ध बनाये गए कानूनों का सख्ती से पालन करना चाहिए तथा अपराधी को कड़ा दण्ड देने की व्यवस्था की जानी चाहिए! इस तरह से धनवान लोगो को गरीबों की गरीबी का मजाक उड़ाने से रोका जा सकता हैं! माता-पिता को लड़कियों की शिक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए और उन्हें आत्मनिर्भर और अपने पैरों पर खड़े होने योग्य बनाना चाहिए!

4)
दूसरी जाति में होने वाले विवाह को प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योकि इससे हमें योग्य वर को ढूंढने में कठिनाई नहीं होती! माता-पिता के परामर्श में ही प्रेम विवाह को भी प्रोत्साहन देना चाहिए!

5)
पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को दहेज के विरुद्ध अधिक जागरूक होना चाहिए जहाँ भी हमें दहेज लेने व देने के भी समाचार मिलें वहाँ युवा वर्ग पिकेटिंग का मार्ग ग्रहण करके विवाह को सम्पन्न नहीं होने देना चाहिए जब तक कि ली हुई धनराशि वापस न कर दी जाए।  इसके लिए गाँधी जी के सत्याग्रह का शांतिपूर्ण शस्त्र भी कार्य में लाया जा सकता है।

6)
लोगों द्वारा सामूहिक विवाह की योजना बनानी चाहिए, जिसमें गरीब – अमीर सभी वर्गों की लड़कियों के विवाह सम्पन्न हों।

7)
माता-पिता की सुख-शान्ति पर तुषारापात करने वाला, लड़कियों के सुख सुहाग पर वज्रपात करने वाला, आये दिन वधु-हत्याओं और आत्म-दहों को प्रोत्साहन देने वाला यह अत्यंत घिनौना व्यवसाय हैं! दहेज ने निश्चित ही आज एक राष्ट्रीय समस्या के रूप में सरकार और जनता के समक्ष मुँह खोले खड़ा है। यदि जनता ने विशेषकर शिक्षित युवक-युवतियों ने पुरातन मनोवृत्तियों वाले माता – पिता की अवहेलना कर सरकार को हृदय से सहयोग दिया तो भारतीय संस्कृति पर लगा हुआ यह कलंक हमेशा के लिए मिट जायगा!

8)
यदि भारत का प्रत्येक व्यक्ति दिल से दहेज न लेने और न देने की प्रतिज्ञा ले ले, तब यह समस्या खत्म हो सकती है। प्रत्येक भारतीय को यह नारा बुलन्द करना चाहिए कि – “दुल्हन ही दहेज हैं।” तभी हमारा देश दहेज मुक्त हो पाएगा!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ के सदस्यों ने देश में दहेज को खत्म करने की कोशिश की हैं, जिसका परिणाम भी हमें देखने को मिला हैं! अब बहुत सी जगहों पर दहेज के बिना ही शादियां हो रही हैं! कई शहरों में दहेज लेना व दहेज देना पाप बन गया हैं! लोग इस एनजीओ द्वारा किये काम से बहुत ही प्रभावित हो रहे हैं, और लोग इस टीम के साथ सेवा करने के लिए जुड़ भी गए हैं! अगर आप भी अपना सहयोग देना चाहते हैं तो इस एनजीओ  के मैनेजर से सम्पर्क कर सकते हैं!