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GAON ME SIKSHA KA MAHATAV

Gaon Me Siksha Ka Mahatav

GAON ME SIKSHA KA MAHATAV

गांव में शिक्षा का महत्व
स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले भारत के सभी गांव में शिक्षा को बहुत ही कम महत्व दिया जाता था क्योकि उस समय गांव में शिक्षा प्राप्त करने के साधन बहुत ही कम थे! उस समय एक ही प्राथमिक स्कूल हुआ करता था और दस-दस गांव के बच्चे दूर दूर से एक ही गांव में पढ़ने आया करते थे जिसमें पढ़ाने वाले शिक्षक भी बहुत  कम ही हुआ करते थे! उस समय में स्कूल बड़ के पेड़ों के नीचे ही लगा करते थे! कहीं-कहीं जगह पर कच्ची-पक्की इमारते भी होती थी! उस समय दस-पंद्रह गावों  में कहीं पर एक ही माध्यमिक स्कूल हुआ करता था! हाई स्कूल और कॉलेज आदि तो सिर्फ बड़े-बड़े शहरों में ही हुआ करते थे और दूर होने की वजह से गावों के बच्चे वहां पढ़ने नहीं जा पाते थे! उस समय आज की तरह शिक्षा के प्रति जागरूकता भी नहीं होती थी! लोगो के दिमाग में यह मानसिकता बन चुकी थी कि पढ़ना-लिखना समय को नष्ट करना हैं!

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गावों में शिक्षा को लेकर लोगों के मन में जागरूकता तो पैदा हुई परन्तु इसे समग्र सम्पूर्ण नहीं कहा जा सकता! गावों में वह शिक्षा के प्रति सम्मान विकसित नहीं हो पाया, जो शहरों में दिखाई देता था! वहां के कुछ लोग ही बच्चों को शिक्षा दिला पाते थे!  निम्न वर्ग के लोग तो अपने बच्चों को सही ढंग से शिक्षा भी नहीं दिला पाते थे! लड़के, लड़कियों को अपने घर के काम धंधे में लगा दिया जाता था! स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोगों के मन में शिक्षा के प्रति जागरूकता तो आयी परन्तु कई लोगो के मन में मानसिक जागृति नहीं आ पायी थी!

वर्तमान में सभी स्तरों पर गावों में भी शिक्षा का बहुत विस्तार हो चुका हैं! प्रारंभिक, माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक, स्कूल और कॉलेज भी गांवों में या उनके आस-पास उपलब्ध हैं। आजकल गावों में शिक्षा को लेकर हर तरह की सुविधा उपलब्ध हैं जिससे बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं! गावों में संस्थाओं का अच्छे से विस्तार और व्यवस्था भी कर दी गयी हैं ताकि बच्चों को अपने भविष्य को लेकर किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े! आज के समय में गांव शिक्षा में मामले में पहले से काफी आगे बढ़ चुका हैं और वहां के लोग शिक्षा का अर्थ और उसका महत्व भी जान चुके हैं! और आने वाले समय में भारतीय गांव शिक्षा के क्षेत्र में बहुत प्रगति करेगा! इस बात की भविष्य में उचित आशा की जा सकती हैं! स्कूलों में, कॉलेजों में भी गावों के छात्रों के संख्या बढ़ने लगी हैं क्योकि गावों में स्कूल और कॉलेज की संख्या बढ़ने से लोगों शिक्षा में रूचि लेने लगे है!जबसे गावों में शिक्षा के क्षेत्र में विकास हुआ हैं तबसे स्कूलों और कॉलेजों में गाँव के स्टूडेंट की संख्या में बढ़ोतरी हुई हैं जिससे गाँव में भी विकास होने लगा हैं क्योकि गाँव वालों को अब शिक्षा से सम्बंधित हर प्रकार की सुविधा गावों में ही मिल जाती हैं! आज के समय में अंग्रेजी शिक्षा का बहुत ही महत्व हैं तो गावों में भी अंग्रेजी शिक्षा से सम्बन्धित कई हाई स्कूल बने हुए हैं जहाँ बच्चों को हर प्रकार की सुविधा दी जातीं है अब उन्हें पढ़ने के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं होती इसीलिए अब गावों में पढ़ने के मामले के मामले लड़कियों की संख्या भी बढ़ रहीं हैं क्योकि पहले लोग अपनी बेटियों को बाहर पढ़ने के लिए कम ही भजते थे क्योकि उन्हें दूर शहर जाना पड़ता था परन्तु अब गाँव में हर सुविधा मिल जाती हैं इसीलिए लड़कियों को भी अब गावों में पड़ने की अनुमति दी जाती हैं!
निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ द्वारा लोगो तक यह सन्देश पहुँचाया जाता हैं कि गाँव में लोगों को शिक्षा के प्रति कैसे उजागर किया जाए! गाँव के लोगो को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया जाता हैं ताकि यह शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सके और गाँव के बच्चों का भविष्य उज्वल हो सके!