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If there is water then there is tomorrow - how is water useful in our life?

If there is water then there is tomorrow - how is water useful in our life?

जलहैतोकलहै - जलहमारेजीवनमेंकिसप्रकारउपयोगीहै? 

 

मनुष्य का शरीर को पाँच तत्वों - आकाश , वायु , अग्नि , जल और पृथ्वी से बना हुआ है। हमारे लिए जल एक जीवन तत्व है जिससे हमारा अस्तित्व संबंधित है। संपूर्ण विश्व 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाता है। इसका उद्देश्य है कि लोग जल के महत्व को समझे और जल संरक्षण के प्रति जागृत हो सके। लेकिन पहले ऐसा नहीं था। पहले हर कोई जल संरक्षण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझता था और आगे आने वाली पीढ़ी के लिए जल बचा के रखने का काम करता था। 

क्या कभी आपने ये सोचा है कि हमारे आस-पास दिखने वाले बड़े-बड़े तालाब, कुंए  इत्यादि कैसे उत्पन्न हुए होंगे ?  आखिर इनको किसने बनाया होगा और तब तो इतनी जनसंख्या भी नहीं थी तो इनको बनाने की क्या आवश्यकता थी ?

 

ऐसे तमाम सवालों को जल अपने में सहजे हुए है और आज भी धरती और हमारी प्यास को बुझाते हुए हमसे यह कहती है कि अभी भी वक्त है हमें बचा के रखे नही तो आगे आने वाली पीढी को क्या जवाब दोगे ? कि "आप के हिस्से के पानी को हम ने बर्बाद कर दिया।"

 

 

पानीहमारेलिएक्योंज़रूरीहै

 

वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार एक व्यक्ति बिना भोजन के 1 हफ्ते तक जीवित रह सकता है, लेकिन पानी की 1 बूंद के बिना वह 5 दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता है। इंसान के शरीर में जैसे ही 1% भी पानी की कमी होती है उसे प्यास लगने लगती है। 5% तक की कमी आने पर शरीर की नसों और उस के स्टैमिना में कमी आने लगती है।

 

ऐसा होने पर शरीर बहुत थका और बहुत ही सूखापन महसूस करने लगता है। अगर शरीर में पानी के स्तर में 10% की कमी आती है तो इंसान को धुंधला दिखने लगता है, वह बेहोशी की हालत में आ जाता है। अगर शरीर में पानी की कमी 20% तक हो जाए तो यह इंसान की मौत का कारण भी बन सकती है।  यही कारण है कि इंसान को हमेशा अपने शरीर में पानी की पूर्ति करते रहना चाहिए।

 

 

जलसंकटकोसमझिये

 

हमारे चारों तरफ दिखने वाले तालाब कुएं , नदियां ,समुंदर आदि जल स्त्रोत और उनके किनारे लगी हरियाली हमें यह सिखाती है कि किस तरह हम सदियों से जल को संरक्षित कर के रखे हुए हैं। लेकिन आज के औधोगिकीकरण या तकनीकी युग में हम वृक्ष तो काट ही रहे हैं साथ ही उन जल स्त्रोतों को पाट कर उस पर बड़ी-बड़ी इमारतें बना दे रहे हैं जिससे धीरे-धीरे यह मिटने लगे हैं और हम सूखे की परिस्थिति की तरफ बढ़ने लगे हैं। आज भी ऐसे बहुत सी जगह हैं जहां होली के बाद पानी के कमी के कारण पूरा गांव पलायन के लिए मजबूर है क्योंकि होली के दौरान पानी में रंगो की मिलावट से वह दूषित हो जाता है और हमारे किसी काम का नहीं रहता है अतः वह व्यर्थ हो जाता है जिससे जल का भारी अभाव उत्पन्न हो जाता है।

 

अगर हम अभी भी नहीं जागे तो वह दिन दूर नही है जब हम सब को दुनिया से पलायन करना पड़ेगा क्योंकि पानी सब की जरूरत हैं और पीने योग्य पानी के स्रोत्र बहुत कम बचे है और वैज्ञानिको का मानना है कि अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए ही होगा। कावेरी जल विवाद इसका सटीक उदाहरण है।


 

जलकीवर्तमानस्थिति

 

हम मानते है कि हमारे लिए प्रगति भी बहुत जरूरी है लेकिन क्या हम अपने भविष्य को खत्म कर के अपने वर्तमान की कल्पना कर सकते हैं ? हम नदियों को सुखा कर केवल पानी नही खत्म कर रहें हैं बल्कि उसके साथ उन जीवों की भी हत्या कर रहे जो जल में रहते है। उनका जीवित रहना पृथ्वी के जीवन से जुड़ा है। हम केवल जल को नहीं खत्म कर रहें साथ आगे आने वाली पीढ़ी को भी खत्म कर रहे है क्योंकि धरती पर मौजूद हर प्राणी का आधार जल ही है।

 

जल खत्म हो गया तो किसान खेती नही कर सकते हैं साथ ही कोई वृक्ष नही उगेगा , बिना वृक्ष के हमको ऑक्सीजन नही मिलेगा जिससे हम सांस नही ले पाएंगे। इस स्तिथि की कल्पना करना जितना कठिन है उससे कहीं ज्यादा ऐसे स्तिथि में जीवन यापन करना है।

 

पृथ्वी पर तीन चौथाई भाग जल हैं लेकिन 97% जल खारा है मात्र 3% जल पीने योग्य है। उसमे भी 2% जल ग्लेशियर और बर्फ के रूप में है , तो अब हमारे पास बस पीने योग्य केवल 1% ही जल है रह जाता है। अब हम क्या कर सकते हैं ? हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि जल संरक्षित हो और उसके स्रोत आगे बढ़े ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रहें।

 

जलबचानेकेउपाय

 

  • जल को सुरक्षित करने के लिए हमें इसका प्रारम्भ अपने घर से करना होगा इन आसान से उपायों के ज़रिये

 

  • गाड़ी धोते समय गीले कपड़े या बाल्टी का प्रयोग करें।

 

  • नहाने में कम पानी का उपयोग करे साथ ही शॉवर को न चलाये।

 

 

  • जब कपड़ो की मात्रा अधिक हो तो वांशिग मशीन का प्रयोग करें।

 

  • किचन में टब या ऑटोमैटिक नल का प्रयोग करे क्योकि इससे जितनी ज़रुरत हो उतना ही पानी गिरता है।

 

  • घर के पास कम से कम 5 वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए जिससे जल का संरक्षण हो सके।

 

  • अपने रोड के आस-पास के किनारे वृक्ष लगाने से छाया के साथ भूमिगत जल को रिचार्ज किया जा सकता है।

 

  • घर के पौधो को पानी रात में देना चाहिए जिससे पानी वाष्प न बने और कम पानी में पौधों की अच्छी सिचाई हो।

 

  • लोगो को जागरूक करना चाहिए चल संरक्षण के लिए और पानी बर्बाद करने पर उनको रोकना चाहिए।

 

  • आस-पास के सार्वाजनिक स्थानो पर लगे नल या ट्यूबवेल की निगरानी करनी चाहिए खराब हो तो जल्द ही बनवाना चाहिए।

 

  • घर के नल या पाइप की मरम्मत करानी चाहिए जिससे बूंद-बूंद पानी को बचाया जा सकें।

 

  • वर्षा के जल को अपने छत पर एक साफ जगह सुरक्षित करना चाहिए और उसको अपने दैनिक काम में प्रयोग करना चाहिए क्योकि वर्षा जल का सब से अच्छा स्रोत है।

 

  • आरो या एसी के खराब पानी का प्रयोग कार धोने कुलर भरने या पोछा लगाने के लिए करना चाहिए।

 

  • पानी को कई बार प्रयोग में लाना चाहिए न कि उसे एक बार प्रयोग कर के फेक देना चाहिए और सम्भव हो तो उसको पेड़ के नीचे या हरी घास पर डालना चाहिए।

 

  • हमें अपने आस-पास एसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे जल भूमि के अन्दर जाए और भूमिगत जल की मात्रा बढ़ सके।

 

 

  • हम इन उपाय का प्रयोग कर के जल के स्रोत को संरक्षित कर सकते है क्योंकि जल है तो कल है। इसलिए हम सब को जल संरक्षण को अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए।