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JAL BACHANE ME SAMANE ANE WALI KATHINAIYAN

Jal Bachane Me Samane Ane Wali Kathinaiyan

JAL BACHANE ME SAMANE ANE WALI KATHINAIYAN

जल बचाने में सामने आने वाली कठिनाइयाँ
वन्य प्राणियों की संख्या में कमी भी जल संकट का प्रमुख कारण हैं जिसकी वजह से जैव विविधता  बड़ा संकट उत्पन हो सकता हैं! आज से कुछ साल पहले नर्मदा नदी में बहुत ज्यादा संख्या में मछलियाँ हुआ करती थी, परन्तु अब हर जगह बाँध बनने की वजह से यह संख्या कम हो गयी हैं, और साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का भी शोषण होने लगा हैं जिसकी वजह से समाज को काफी हद तक संकट का सामना करना पड़ता हैं! जल संकट भी इसका एक बड़ा रूप हैं! लेकिन और भी कई ऐसी बाते हैं जिसकी वजह से जल को बचने में कठिनाईयां उत्पन होती हैं जैसे कि ग्लोबल वार्मिंग, जंगलों का घटना, जैव-विविधता और वन्य प्राणियों की तादाद में कमी, खेती के संकट और सेहत पर असर आदि कई रूपों में सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संकटों का सामना करना  पड़ता हैं! ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा खतरा बारिश पर पड़ता हैं और बारिश न होने की वजह से सीधा असर खेतों पर पड़ता हैं! क्योकि बारिश न होने से फसलें खराब हो जाती हैं और सूखा भी पड़ जाता हैं जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ता हैं!

केमिकल उत्पाद का कम से कम उपयोग करना
आज के समय में फसलों के जल्दी उत्पादन के लिए उसमे केमिकल डाले जाते हैं, जो बहुत ही हानिकारक होते हैं! यह भी जल संकट का एक कारण हैं, क्योकि केमिकल डालने से पेड़-पौधे पानी को जल्दी सींच लेते हैं जिससे हर जगह पानी की कमी रहती हैं! इसीलिए लोगो को कम से कम केमिकल का उपयोग करना चाहिए ताकि जल को बिना किसी परेशानी के बकचाया जा सके!

जंगलो की कटाई
आजकल के समय में भारी संख्या में जंगलो की कटाई की जा रही हैं जिसकी वजह से पानी की समस्या बहुत बढ़ रही हैं! जंगलों की कटाई करके लोग बड़ी-बड़ी इमारतें जैसे स्कूल, कॉलेज, मॉल आदि बना रहे हैं! जिससे पेड़-पौधों की संख्या में कमी आनी शुरू हो गयी हैं! बारिश के पानी को नदियों तक पहुंचाने के लिए भी जंगलों की कटाई की जाती हैं क्योकि नदियों का पानी पाइप लाइनों के जरिए शहरों तक भेजा जाता हैं!

देश के सभी किसान खेती के लिए मानसून पर ही निर्भर हैं! कमजोर मानसून का प्रभाव हमारे देश की आबादी पर पड़ता हैं! जमींन में पानी का भण्डार लगातार कम होता जा रहा हैं क्योकि बारिश कम होने लगी हैं और धरती भी गरम होने लगी हैं! नर्मदा जैसी नदियों में भी पानी की कमी हो रही हैं और यह गन्दी होकर सिकुड़ती जा रही हैं!

निष्कर्ष
 
हमें पानी के प्राकृतिक तौर-तरीकों को समझकर ही प्रकृति में ही इसकी समस्या को ढूंढने की कोशिश करनी होगी! बारिश के पानी के साथ-साथ प्राकृतिक जल संरचनाओं को सहजने पर भी ध्यान देना होगा! जंगलों की कटाई और फसलों में केमिकल डालने पर भी रोक लगानी होगी ताकि पानी को बचाया जा सके! मुस्कान एनजीओ समाज को यह सन्देश पहुंचाता हैं कि किस तरह हमें जंगलों और पेड़-पोधो को सरंक्षित करके जल प्रदूषण को रोकना चाहिए ताकि प्रकृति की नेमत का पानी हमे हमेशा लगातार मिलता रहे! जल को बचाने का सबसे बड़ा समाधान ही प्राकृतिक समाधान हैं!