A PHP Error was encountered

Severity: Notice

Message: Undefined offset: 0

Filename: views/blog-details.php

Line Number: 12

A PHP Error was encountered

Severity: Notice

Message: Trying to get property of non-object

Filename: views/blog-details.php

Line Number: 12

"/>

A PHP Error was encountered

Severity: Notice

Message: Undefined offset: 0

Filename: views/blog-details.php

Line Number: 13

A PHP Error was encountered

Severity: Notice

Message: Trying to get property of non-object

Filename: views/blog-details.php

Line Number: 13

" />

No One Has Ever Become Poor By Giving!

  • Phone:+91 9953659128
  • Email: info@muskanforall.com
Franchise Volunteer Donate Us

JAL PRADUSHAN KE KARAN

Jal Pradushan Ke Karan

JAL PRADUSHAN KE KARAN

जल प्रदूषण के कारण
मानव की गतिविधियों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा जल में हानिकारक तत्व मिल जाते हैं जिससे जल दूषित हो जाता हैं! प्रदूषित जल मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों और पेड़-पौधों के लिए भी हानिकारक हैं क्योकि इसका उपयोग जीवन के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता हैं! हैजा, टीबी, पीलिया, टाइफाइड, लकवा, पोलियो आदि जैसी बीमारियां गंदे जल की वजह से ही फैलती हैं! शहरों की वजह से जल अधिक प्रदूषित होता हैं क्योकि सीवर के माध्यम से गन्दा पानी जल के प्राकृतिक स्त्रोतों में बहा दिया जाता हैं इसी प्रकार उद्योगों से निकलने वाला गन्दा और दूषित जल भी नदियों में मिला दिया जाता हैं!

मुख्य रूप से जल के प्रदूषित होने के दो प्रमुख कारण हैं;
1) प्राकृतिक कारण
बारिश के दिनों में तेजी से बहता हुआ पानी गन्दी नालियों में जा मिलता हैं और साथ ही साथ इसमें मिट्टी में मौजूद खनिज, पेड़ों के पत्ते, ह्यूमस, मानव एवं पशु के मलमूत्र इत्यादि मिल जाते हैं। जिस जगह पर पानी इकट्ठा किया जाता हैं, अगर वहां की मिट्टी में विषाक्त तत्व हो तो वे भी पानी मिल जाते हैं और जल को प्रदूषित कर देते हैं और यदि इन प्रदूषकों की मात्रा ज्यादा हो तो जल जहरीला भी हो सकता हैं! वैसे तो जल में विषाक्त पदार्थों के अलावा कुछ जहरीलें तत्व की मात्रा पहले से ही मौजूद होती हैं!

2)
मानवीय कारक
मानव की विभिन्न गतिविधियों के द्वारा अपशिष्ट जल स्वच्छ जल में मिल जाता हैं और जल प्रदूषित हो जाता हैं! जल प्रदूषण के कुछ ऐसे स्रोत इस प्रकार है:

1)
घरेलू अपशिष्ट   
लोगों द्वारा तालाबों और नहरों में स्नान करने, कपड़े धोने, बर्तन साफ़ करने और पशुओं को नहलाने की वजह से जल प्रदूषित हो जाता हैं! इसी प्रकार घर में काम करते समय घरेलू अपशिष्ट जैसे फल और सब्जियों के छिलके, रसोई से निकलने वाला गन्दा पानी, मल और अन्य अपशिष्ट पदार्थ नालियों से जल निकायों में प्रवाहित हो जाता हैं! अब लोगों द्वारा सिंथेटिक डिटर्जेंट का उपयोग सफाई के समय में ज्यादा होने लगा हैं जिससे यह जल के स्त्रोतों में मिलकर  प्रदूषित कर देता हैं!

2)
मल
हमारे देश में जनसँख्या वृद्धि तेजी से बढ़ रही हैं जिसकी वजह से मलमूत्र का निपटान भी एक गंभीर समस्या बन गया हैं क्योकि मलमूत्र को सीधे नदियों और नहरों में प्रवाहित कर दिया जाता हैं जिससे जल के स्त्रोत दूषित हो रहे हैं! जिसकी वजह से मानव को कई बीमारियां भी लगने लगी हैं यह एक गंभीर स्थिति बन गया हैं!

3)
औद्योगिकी प्रभाव
औद्योगीकरण में तेजी से विकास की वजह से कारखानों की संख्या में भी कई गुना वृद्धि हुई हैं, परन्तु अभी तक इस कारखानों से निकलने वाले अपशिष्टों से निपटने की उचित व्यवस्था की गयी हैं! इन अपशिष्टों को सीधे ही नदियों,तालाबों आदि में सीधे ही प्रवाहित कर दिया जाता हैं! इसके कारण जीव-जंतु और पेड़-पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं और साथ ही पानी पीने के अयोग्य भी हो जाता हैं!

4)
कृषि अपशिष्ट
कृषि के क्षेत्र में उत्पादन को को बढ़ावा दिया जाता हैं जिसके लिए नए नए तरीकों का प्रयोग किया जाता हैं, जिसके साथ ही रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि का प्रयोग भी तेजी से बढ़ने लगा हैं लेकिन इसकी कीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ती हैं क्योकि पर्यावरण को भारी नुक्सान का सामना करना पड़ता हैं! इसकी वजह से मिट्टी के कटाव में वृद्धि हुई हैं जो नदियों के प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर सकता हैं! जल मिट्टी और कीचड़ के जमाव की वजह से भी दूषित हो रहा हैं!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ द्वारा प्रदूषण के कारणों को खत्म करने की कोशिश की जा रही हैं! इसके द्वारा लोगों को प्लास्टिक के बैग का प्रयोग ना करने की सलाह दी जाती हैं, ताकि प्रदूषण को खत्म किया जा सके! इस टीम ने लोगों को जागरूक करने के लिए कई ठोस कदम उठाये है जिनका लोगों द्वारा पालन भी किया जा रहा हैं !
 

Enquiry Form