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JANGALO KO KATANE SE HONE WALE NUKASAN

Jangalo Ko Katane Se Hone Wale Nukasan

JANGALO KO KATANE SE HONE WALE NUKASAN

जंगलों को काटने से होने वाले नुकसान
आज के आधुनिक समय में जनसंख्या वृद्धि के साथ जंगलों का विनाश बढ़ गया है। लोग नहीं जानते कि पेड़ हमारी जिंदगी हैं। कटाव के कारण सभी पहाड़ और जंगल के पेड़ वीरान हैं। औषधीय पौधे खोजना बहुत दुर्लभ है और बारिश नहीं हो रही है। पेड़ों से हमें जीवनदायिनी हवा (ऑक्सीजन) मिलती है, पेड़ों और जंगलों से हम अपनी काफी ज़रूरतों को पूरा कर पाते हैं। जंगलों के ही कारण बारिश होती है लेकिन तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या के कारण मानव अपनी जरूरतों के लिए अंधाधुंध जंगलों का विनाश कर रहा है। यही कारण है कि आज जंगलों का अस्तित्व खतरे में है। नतीजतन मानव जीवन खतरे में भी है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में हर साल 1 करोड़ हेक्टेयर इलाके के वन काटे जाते हैं। अकेले भारत में 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल कट रहे हैं। शहरीकरण का दबाव, बढ़ती आबादी और तेजी से विकास की भूख ने हमें हरी-भरी जिंदगी से वंचित कर दिया है।

 वनों की कटाई से मिट्टी, पानी और वायु क्षरण होता है जिसके परिणामस्वरूप हर साल 16,400 करोड़ से अधिक वृक्षों की अनुमानित मात्रा में कमी देखी जाती है। वनों की कटाई भूमि की उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव डालती है। इसके कई दुष्प्रभाव होते हैं:

बाढ़औरसूखा:
मिट्टी का कटाव मिट्टी के प्रवाह को बढ़ाता है जिसके कारण बाढ़ और सूखा का विशिष्ट चक्र शुरू होता है। पहाड़ी ढलानों पर जंगलों को काटना मैदानों की ओर नदियों के प्रवाह को रोकता है जिसका पानी की दक्षता पर असर पड़ता है फ़लस्वरूप पानी तेजी से नीचे की ओर नहीं आ पाता।

वनोंकीकटाई की वजह से भूमि का क्षरण होता है क्योंकि वृक्ष पहाड़ियों की सतह को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा तेजी से बढ़ती बारिश के पानी में प्राकृतिक बाधाएं पैदा करते हैं। नतीजतन नदियों का जल स्तर अचानक बढ़ जाता है जिससे बाढ़ आती है।

वायुप्रदूषण:
वनों की कटाई के परिणाम बहुत गंभीर हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान वायु प्रदूषण के रूप में देखने को मिलता है। जहां पेड़ों की कमी होती है वहां हवा प्रदूषित हो जाती है और शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या सबसे ज्यादा है। शहरों में लोग कई बीमारियों से पीड़ित हैं विशेष रूप से अस्थमा जैसी साँस लेने की समस्याओं से।

रेगिस्तान के फैलाव:

जंगलों के क्षेत्र में निरंतर कमी और भूमि के क्षरण के कारण रेगिस्तान एक बड़े पैमाने पर फैल रहा है।


निष्कर्ष

आज जंगलों को अंधाधुंध रूप से काटा जा रहा है जिसके परिणाम स्वरूप मौसमी परिवर्तन, मिट्टी में गर्मी, ओज़ोन परत की कमी आदि में वृद्धि हुई है। इस महत्वपूर्ण स्थिति में जंगल की रक्षा करना न केवल हमारा कर्तव्य होना चाहिए बल्कि हमारा धर्म भी होना चाहिए। मुस्कान एनजीओ द्वारा संदेश दिया कि हम सब पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकने की प्रतिज्ञा ले और जंगल को बचाने में एक अमूल्य योगदान करे। यदि वास्तव में हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगल की विरासत की रक्षा करनी है तो हमें उनसे लाभ प्राप्त करने की सोच की बजाए जीवन के लिए जंगलों को बचाने की सोच का विकास करना होगा।