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JANGALO KO KATNE KE KARAN AUR ROKNE KE TARIKE

Jangalo Ko Katne Ke Karan Aur Rokne Ke Tarike

JANGALO KO KATNE KE KARAN AUR ROKNE KE TARIKE

जंगलों को काटने के कारण और रोकने के तरीके
मनुष्य जीजंगलको स्वस्थ बनाए रखने के लिए केवल धन और भोजन ही पर्याप्त नहीं प्राप्त होता है। बल्कि इसके लिए शुद्ध वातावरण और स्वस्थ भौगोलिक वातावरण भी उम्मीद की जाती है। जंगल को आम तौर पर एक विशाल क्षेत्र के रूप में संदर्भित किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के पौधों और पेड़ होते हैं। यह जंगली जानवरों और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक आवास हैं। जंगल का निर्माण अलग-अलग तरह की परतों से होता है जिनका अपना महत्व और कार्य हैं। परन्तु वर्तमान काल में मानव के कल्याण की बात तो हर कोई करता है, लेकिन उनके आधार भूत प्राकृतिक साधन जंगल का विन्स्ग रोकने का प्रयास कोई नहीं करता हैं। इसके अलावा जंगलों की बेहताशा कटाई से मानव की भलाई और वातावरण की समस्या बढ़ रही है।
 अशुद्ध वायु को शुद्ध कर उसे स्वास्थ्य के अनुकूल बनाते है। वृक्षों की पत्तियां वातावरण में अशुद्ध वायु अर्थात कार्बनडाई ऑक्साइड को ग्रहण कर ऑक्सीजन का उद्वमन करती है। जंगल के आकर्षण से बादल जल बरसाते है और धरती उपजाऊ बन जाती है। इस प्रकार जंगल तथा वृक्षावली पर्यावरण के रक्षक माने जाते हैं।

कटते जंगल एक समस्या-
वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि के कारण जंगल तीव्र गति से कट रहे हैं। लोगों के आवास योग्य मकानों के लिए ईंधन, ईमारती लकड़ी, फर्नीचर, उद्योग धंधों की ज़रूरतों के लिए जंगल को काटा जा रहा हैं।  उद्योगों की शुरुआत तथा सड़कों के निर्माण में जंगल की भूमि का विदोहन तीव्र गति से हुआ हैं। मकानों के लिए पत्थर, गारा आदि की पूर्ति के लिए जंगलउजाड़े गये हैं। इन सभी कारणों से आज कटते जंगल का वातावरण के लिए एक भारी समस्या बन गये हैं। इस ज़मीन पर फिर से पेड़ों को लगाया नहीं जाता। औद्योगिक युग के विकास के बाद से दुनिया भर के लगभग आधे जंगलों को नष्ट कर दिया गया है। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ने की संभावना है क्योंकि उद्योगपति लगातार निजी लाभ के लिए जंगल भूमि का उपयोग कर रहे हैं। लकड़ी और वृक्षों की अन्य घटकों से विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन के लिए बड़ी संख्या में वृक्षों को भी काटा जाता है।

कटते जंगल की रोकथाम के प्रयास
वर्तमान में कुछ सामाजिक संगठन पर्यावरण प्रदूषण निवारक संस्था तथा कुछ सरकारी विभाग जंगल की सुरक्षा एवं वृक्षारोपण अभियान चला रहे हैं। उतरा खंड में चिपको आंदोलन तथा कर्नाटक में अप्पिको आंदोलन के द्वारा जंगल की कटाई का विरोध किया जा रहा हैं।
राजस्थान में विश्नोई समाज ने वृक्षों की कटाई के विरोध में कई बलिदान दिए हैं। देश के अन्य राज्यों में भी वृक्ष मित्र सेना द्वारा जंगल की कटाई का विरोध हो रहा है। जंगल एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कठोर कानून बनाकर जंगल की कटाई रोकी जा रही हैं। वर्तमान में जंगल की अंधाधुंध कटाई होने से पर्यावरण प्रदूषण का भयानक रूप उभर रहा है। इस दिशा में कुछ मानवता वादी चिंतकों एवं पर्यावरणविद वैज्ञानिकों का ध्यान गया हैं। उन्होंने कटते जंगल और घटते मंगल को एक ज्वलंत समस्या मानकर उसके निवारण के सुझाव भी दिए हैं।

उपसंहार
जंगलमानव जाति के लिए एक वरदान है। भारत को विशेष रूप से कुछ सुंदर जंगलों का आशीष मिला है जो पक्षियों और जानवरों की कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए घर हैं।मुस्कान एनजीओ द्वारा संदेश दिया जाता है कि मनुष्य को जंगल के महत्व को पहचाना जाना चाहिए और सरकार को जंगल की कटाई के मुद्दे पर नियंत्रण के लिए उपाय करना चाहिए। आज जिस तरह से मानवीय दोष के कारण पर्यावरण ख़राब हो रहा है उसके लिए जंगलों को सख़्ती से बचाने और बनाए रखने की बहुत बड़ी जरूरत है। केवल ऐसा करने से हम सभी जीवों के भविष्य को बचा सकते हैं।
 
 
 

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