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KAISE DAHEJ KANOON DULHE KI PARESHANIYA BADHA RHE HAI!

Kaise Dahej Kanoon Dulhe Ki Pareshaniya Badha Rhe Hai

KAISE DAHEJ KANOON DULHE KI PARESHANIYA BADHA RHE HAI!

कैसे दहेज कानून दूल्हे की परेशानियाँ बढ़ा रहे हैं!
दहेज लेना और दहेज देना दोनों ही अपराध है! दहेज लेने और देने वालों को 6 महीने की अधिकतम सजा सुनाई जाती हैं या आरोपी को 5000 रूपये तक का जुर्माना अदा करना पड़ता हैं! संशोधन अधिनियम कानून के अनुसार इन सजाओं को बढ़ाकर न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 10 साल तक की सजा तय कर दी गयी है! इन्ही कानून को बना देने से दूल्हे पक्ष वालो को परेशानी होती हैं! उन्हें अब दहेज मांगने में हिचकिचाहट महसूस होती हैं! अब वह सामने से दहेज नहीं मांग सकते क्योकि उन्हें अब सजा का डर रहता हैं! सुप्रीम कोर्ट ने पति और ससुराल वालो के उत्पीड़न से बचाने के लिए भारतीय दंड संहिता की मशहूर धारा 498-ए पर अहम निर्देश जारी किए हैं! कोर्ट के अनुसार अगर कोई महिला अपने पति और ससुराल के खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए के तहत दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करती है तो उसके ससुराल वालों और पति को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जायगा!

दहेज को रोकने के लिए सरकार ने कई धाराएँ भी बनाई हैं जो इस प्रकार हैं:-

धारा 2
धारा 2 के अनुसार एक व्यक्ति द्वारा दूसरे पक्षकार को विवाह के समय या पहले या बाद में दहेज देने के लिए सहमत होना! इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति दहेज लेता या देता हैं तो उसे सजा और जर्माना भी पड़ना पड़ सकता हैं!

धारा 3
इस धारा के अनुसार दहेज लेने या देने का अपराध करने वालों को कम से कम पाँच साल की सजा और साथ में 15000 रूपये या उतनी राशि जितनी कीमत उपहार की हो, इन दोनों में से जो भी ज्यादा हो, के जुर्माने की सजा सुनाई जायगी! लेकिन शादी के समय वर और वधु को देने वाले उपहारों को इसमें शामिल नहीं किया जायगा!

धारा 4
यदि किसी लड़के के माता-पिता या रिश्तेदार प्रत्यक्ष रूप से दहेज की मांग करते हैं तो उन्हें कम से कम 6 महीने की और अधिकतम 2 वर्षों के कारावास की सजा और 10000 रूपये तक का जुर्माना भी हो सकता हैं!

धारा 4
किसी भी व्यक्ति द्वारा मिडिया के माध्यम से शादी के एवज में सम्पति या हिस्से का प्रस्ताव भी दहेज की श्रेणी में आता हैं और उस इंसान को कम से कम 6 महीने की और अधिकतम 5 साल की सजा और 15000 रूपये तक का जुर्माना भी हो सकता हैं!

धारा 6
यदि दहेज किसी विवाहिता के अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति द्वारा धारण कर किया जाता है तो दहेज प्राप्त करने के 3 महीने के भीतर और लड़की के नाबालिग होने की स्थिति में उसके बालिग होने के 1 साल के अन्दर उसे अंतरित कर दिया जायगा! यदि महिला की मृत्यु हो गयी हैं और उसकी कोई संतान भी नहीं हैं तो अभिभावक को दहेज में अंतरण किया किया जायगा और यदि संतान हैं तो संतान को अंतरण किया जायगा!

धारा 8
यदि दहेज लेने की घटना से एक साल के अन्दर शिकायत की गयी हैं तो न्यायालय पुलिस रिपोर्ट द्वारा शिकायत किये जाने पर सजा हो सकती हैं!

धारा 8 बी
दहेज निषेध पदाधिकारी द्वारा बनाये गए नियमों का अनुपालन कराने और दहेज की मांग के लिए उकसाने या लेने से रोकने या फिर अपराध कारित करने से संबंधित साक्ष्य जुटाने का कार्य करेगा। और उन्हें सजा सुनाई जायगी!

निष्कर्ष
इसी प्रकार सरकार ने काई कानून और धाराएँ बनाई हैं जो दहेज लेने वालो के लिए समस्या उत्पान कर सकता हैं! इन्ही धाराओं के चलते लोग दहेज नहीं लेते क्योकि उन्हें जुर्माने और सजा का डर बना रहता हैं, और कानून इसी तरह सख्त रहे तो एक दिन जरूर समाज से दहेज लेना और देना बिलकुल बंद हो जायगा!
 

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