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Kaise Kanya Hatya Samaj Ke Liye Abhishap Hai

KAISE KANYA BHRUN HATYA SAMAJ KE LIYE ABHISHAP HAI ?

कैसे कन्या भ्रूण हत्या समाज के लिए अभिशाप हैं! 
आज के समय में कन्या भ्रूण हत्या समाज में फैली एक बहुत बड़ी समस्या हैं जो कि एक अभिशाप बन चुकी हैं, यह हमारे समाज में पुराने और विचारों से उत्पन्न होती हैं! अधिकतर मात्रा में कन्या भ्रूण हत्या ससुराल वालों या पति के दबाव की वजह से ही किया जाता हैं! ऐसे लोग बेटियों को कम महत्व देते हैं और बेटों को प्राथमिकता अधिक दी जाती हैं! वही दूसरी और बेटियों को बोझ और गरीबी का कारण माना जाता हैं! हमारे देश में हर रूप में देवी को पूजा जाता हैं, वहाँ पर ऐसे अपराध, यह एक सर्मेंमसार कर देना वाला तथ्य है।

1)लिंगअनुपातपरअसरपड़ना
कन्या भ्रूण हत्या से देश में लिंग अनुपात कम हो जायगा और पुरुषों की संख्या के मुकाबले में महिलाओं की संख्या में कमी आ जायगी! देश में लिंग अनुपात कम होने से सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से हमारे समाज पर बुरा असर पड़ेगा! हमारे भारत जैसे विकासशील के क्षेत्र में कई काम  ऐसे हैं जिन्हे महिलाये निपुणता से करना जानती हैं! किसी भी देश के विकास के लिए उस देश का लिंग अनुपात सही होना चाहिए ताकि महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार मिल सके!

2)प्राकृतिक संतुलन बिगड़ना
प्रकृति ने महिलाओं और पुरुषों को भिन्न-भिन्न प्रकार की क्षमताएं दी हैं। महिलाओं के पास ऐसी कई खुबियां हैं जो पुरुषों के पास नहीं हैं और कई ऐसी खुबियां पुरुषों के पास है जो महिलाओं के पास नहीं हैं! अगर देश में महिलाओं की संख्या घटी गयी तो प्रकृति पर बुरा असर पड़ेगा!  कन्या को भ्रूण में मार दिया गया तो कई रिश्ते साथ में ही खतम हो जाते हैं! प्रकृति का संतुलन बनाने के लिए भी महिलाओ का भी होना बहुत जरूरी हैं!

3) जन्संख्या में गिरावट आना
ईश्वर ने महिलाओं को जन्म देने का वरदान प्राप्त किया हैं अगर भ्रूण में ही किसी कन्या को मार दिया जायगा तो आने वाले समय में नए शिशुओं का जन्म कैसे होगा और अगर माँ ही नहीं होगी तो बच्चों का जन्म कैसे होगा! अगर कन्या भ्रूण हत्या की संख्या में वृद्धि होगी तो इसके कारण महिला लिंग अनुपात की दर कम होगी और बच्चे पैदा करने की दर भी कम होगी और साथ ही साथ जनसँख्या में भी वृद्धि नहीं होगी! भारत और चीन जैसे देशो में जनसँख्या में वृद्धि हो रही हैं परन्तु एक लिंग को खत्म करने से इसका समाधान नहीं निकलेंगा!

4)रेप जैसी घटनाओं में वृद्धि
 देश में रेप, छेड़खानी आदि जैसे अपराध बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं और जब महिलाओं की संख्या में गिरावट रहेगी तो उन्हें निम्न स्तर का दर्जा दिया जायगा व उसके साथ अन्याय की घटनाएं भी बढ़ने लगेंगी! महिलाओं की संख्या में कमी होने से शादी के लिए भी महिलाओं की कमी हो रही हैं! हर व्यक्ति को अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे साथी की जरूरत होती हैं परन्तु अगर एक साथी धीरे-धीरे विलुप्त हो जायगा तो उसकी तस्करी शुरू हो जायगी! कभी-कभी कई माँ-बाप पैसों की कमी के कारण अपनी बेटी को बेच देते हैं! तभी बाल विवाह और अनचाहा गर्भ जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं!

7) लड़को की शादी की संख्या में गिरावट आना
अगर हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या इसी प्रकार चलती रही तो आने वाले समय में लड़कियों को संख्या में कमी आनी शुरू हो जायगी और लड़कों की शादी भी नहीं हो पाएगी व उनका परिवार आगे नहीं बढ़ पाएगा! इसलिए शादियों के लिए पुरुषों को अपने सामजिक स्तर पर महिलाएं नहीं मिलती और यही सबसे बड़ा दुष्प्रभाव हैं! महिलाएं और पुरुष दोनों ही सामाजिक रूप से एक दूसरे के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं! महिलाओं और पुरुषों को जीवन व्यतीत करने के लिए एक दूसरे की जरूरत होती ही हैं! अगर हमारे समाज में लड़कियों की संख्या में कमी होगी तो शादी नहीं होगी और महिलाओं का व्यापार होना शुरू हो जायगा!  ही ग़लत हैं!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ के द्वारा हम समाज तक यह सन्देश पहुंचाना चाहते हैं कि समाज में लोगो को कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगानी चाहिए ताकि आने वाले समय में सामाजिक संतुलन बना रहे! अष्टमी वाले दिन कन्याओं को हम देवी के रूप में भी पूजते हैं और शादी के लिए एक लड़के को लड़की की जरूरत होती हैं ताकि आगे परिवार बढ़ाया जा सके इसलिए हमे कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगानी चाहिए!