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Ladka Ladki Ek Saman

LADKA LADKI EK SAMAN

लड़का लड़की एक समान (Gender Inequality)

लड़का और लड़की समाज रूपी गाड़ी के दो पहिये हैं समाज के विकास के लिए इन दोनों का होना बेहद लाज़मी है। लड़का और लड़की सामाजिक व कानूनी रूप से एक जैसे हैं| एक बेहतर समाज बनाने के लिए लड़कों की उतनी ही जरुरत होती है जितनी की लड़कियों की|  आज लड़कियाँ लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं वो सब कुछ कर रही हैं जो आज के दौरान लड़के कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान लड़कियों ने हर क्षेत्र में सफलता हासिल की और यह साबित किया है के लड़कियाँ प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करने में सक्षम हैं।

लड़कियों को अपनी नज़रिए पेश करने की आज़ादी मिलनी चाहिए| उन्हें परिवार की हर निर्णय का हिस्सा बनने देना चाहिए| उन्हें अपने आप को कभी किसी से कम महसूस नहीं करना चाहिए| लड़कियों को आत्मरक्षा की तालीम दे हम उन्हें समाज की गन्दगी से लड़ने की योग्य बनाना चाहिये| आज सरकार और समाज ने लड़कियों को बराबरी का दर्जा दिया है सभी वर्गों में लड़का -लड़की दोनों सामान तरक्की कर रहे हैं। कल्पना चावला , झांसी की रानी और सानिया मिर्जा जैसी महिलाओं ने साबित कर दिया है के लडलड़कियाँ भी किसी से कम नहीं आज कल लड़कियाँ अपने दम पर डॉक्टर , खिलाड़ी , वकील , अध्यापिका , पुलिस , पायलट आदि जैसे सभी महत्वपूर्ण पेशों में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

रानी लक्ष्मी बाई की वीरता की कहानी तो हर कोई जानता होगा जो हम सब के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है। कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारती महिला थी उनका कुछ करने का ज़ज़्बा आज भी हमारे दिल में ज़िन्दा है। निश्चित ही कल्पना चावला आज की लड़कियों के लिए आदर्श है। इसीलिए जब कल्पना चावला जैसी एक माध्यम वर्गीय परिवार की लड़की इतना बड़ा हौसला रख सकती है तो हम लड़कियाँ क्यों नहीं ?

लड़का और लड़की एक समान: इसकी शुरुवात पारिवारिक स्थर से करनी चाहिए-
लड़का और लड़की एक समान का सोच समाज में लाने के लिए हमे सबसे पहले शुरुवात अपने परिवार से करनी चाहिए| हमे अपने बच्चों और छोटे छोटे भाई बहनों को बताना होगा की लड़का और लड़की में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता| लड़कियाँ लड़कों से कम नही हैं| लड़कियाँ लड़कों जैसी हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में सक्षम  हैं|

लड़कियों को लड़कों जैसे समान अधिकार देना चाहिए:
जिस समाज में ज्ञान की देवी ही औरत जात है, उस समाज में हम लड़कियों को शिक्षा से कैसे वंचित रख सकते हैं?  हमे लड़कों और लड़कियों में कोई सामाजिक  भेद-भाव नहीं रखना चाहिए| हमे लड़कियों को लड़कों जैसी समान अधिकार देना चाहिए | लड़कियों को भी शिक्षा की पूरी अधिकार देकर उन्हें अपने आप को साबित करने का मौका देना चाहिए |

महिला शसक्तिकरण की महत्व:
महिला किसी भी समाज की वह हिस्सा हैं जिनके बिना समाज की बढ़ना और गढ़ना दोनों अधूरा रह जाता है | हमारे देश में  हमने ये तो देखा और सुना ही है की वह लड़कियाँ ही है जिन पर जुर्म का नाच नचाया जाता है|

हम बेशक ये कहते हैं की महिलाओं को समाज मे एक मजबूत और निडर किरदार मिलना चाहिए| लेकिन ये तभी मुमकिन हो सकता है जब पूरे समाज इसके लिए दृढ़ संकल्प ले|

महिलाएं जब दृढ़ संकल्प लिए कुछ करने की सोचती हैं तो वह अपने साथ साथ पूरे समाज व देश को आगे लेती हैं | समाज से कुछ कुविचार जैसे की- दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, लड़का लड़की मे अंतर, महिलाओं पर घरेलू हिंसा, योण शोषण को मिटाने से ही महिला शसक्तिकरण का उपयोग किया जा सकता है |