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लड़कियों के प्रति सोच को बदलने की जरूरत क्यों हैं?

Ladkiyo ke prati soch ko badalne ki jarurat kyu hai

लड़कियों के प्रति सोच को बदलने की जरूरत क्यों हैं?

लड़कियों के प्रति सोच को बदलने की जरूरत क्यों हैं?

पूरे संसार में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता हैं और इस दिन सरकारी और गैर सरकारी कार्यक्रम भी किये जाते हैं! इस दिन महिलाओं की दशा और दिशा पर विचार विमर्श किया जाता हैं परन्तु अगले ही दिन हम सब कुछ भूल जाते हैं कि महिलाओं की हमारे समाज में क्या दशा हैं! आज महिलाओं की दशा में बहुत सुधार आया हैं परन्तु पुरुषों के मन में महिलाओं के प्रति सोच में ज्यादा परिवर्तन देखने को नहीं मिला हैं! आज भी महिलायें सुरक्षित नहीं हैं, वह सामजिक और धार्मिक बंधन में बंधी हुई हैं! परन्तु महिलाओं ने हारी नहीं मानी, वह समाज में अपनी हिम्मत और मेहनत से अपनी जगह बना रही हैं और रास्ते में आने वाली कठिनाइयों का डटकर सामना कर रही हैं! इस काम में उन्हें सरकार का भी पूरा सहयोग मिल रहा हैं!

हमारे देश में महिलाओं ने शिक्षा के क्षेत्र में पुरुषों के बराबर लगभग बराबरी कर ली हैं परन्तु घर की जिम्मेदारियों के कारण वह अभी भी आर्थिक जगत में अपनी सही जगह नहीं बना पायी हैं! हमारे समाज में महिलायें घर के बाहर तो निकल रही हैं परन्तु आज भी उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियों निभानी ही होती है! पारिवारिक जिम्मेदारी को निभाने के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद भी वह आत्मनिर्भर नहीं हो पायी हैं! धीरे-धीरे पुरुषों की सोच में परिवर्तन आ रहा हैं, वैसे पुरुषों को अपनी सोच को बदलना मजबूरी बनती जा रही हैं! क्योकि महंगाई के कारण आज के समय में एक आदमी की आय से घर का गुजरा करना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा हैं, इसीलिए कामकाजी महिलायें समाज की जरूरत बनती जा रही हैं! कामकाजी महिलाओं को दोहरा काम करना पड़ता हैं, एक और तो परिवार के लिए घर से बाहर निकलकर काम करती हैं और वही दूसरी और घर की पूरी जिम्मेदारी भी उठाती हैं! घर की जिम्मेदारियों को निभाने में पुरे परिवार को कामकाजी महिलाओं का साथ देना चाहिए तभी वह देश और समाज के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा आकर सकेंगी!

आजादी से पहले महिलायें घर की चार दीवारों तक ही सीमित थी बेशक उन्होंने आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया परन्तु आजादी के बाद से फिर वह घर के चौके-चूल्हें की काम में सिमट गई, उस समय केवल अमीर घरों की महिलायें ही बाहर काम करने जाय करती थी लेकिन सविधान से मिले अधिकारों के अनुसार महिलाओं की स्थिति में तेजी से सुधार आना शुरू हुआ हैं और ये आगे भी लगातार चल रहा हैं! महिलाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिग जैसे कई क्षेत्रों में आगे बी-चढ़ कर हिस्सा लिया हैं और पुरुषों को हर क्षेत्र में पीछे छोड़ दिया हैं! आज महिलायें कुछ जगहों को छोड़कर बिना आरक्षण के ही पुरुषों के लिए चुनौती बनती जा रही हैं! सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में महिलायें अपना हिस्सा प्राप्त कर रही हैं और धीरे-धीरे हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही हैं! महिलाओं के सामने इतनी चुनौतियां होते हुए भी वह अपने हक के लिए संघर्ष कर रही हैं!

निष्कर्ष

हमारे समाज में महिलाओं के प्रति सोच को काफी हद तक बदला जा चुका हैं, इसीलिए महिलायें समाज में खुल कर जी रही हैं और समाज मके विकास में अपना खुल कर उचित योगदान दे रही हैं! मुस्कान एनजीओ के द्वारा महिलाओं को समाज के द्वारा समानता और स्वतन्त्रता का अधिकार दिलवाने में भी मदद मिली हैं! महिलाओं की सुरक्षा बहुत ही जरूरी हैं, क्योकि अगर वे सुरक्षित नहीं हैं तो वह अपना काम ठीक से नहीं कर पाएंगी!

इसीलिए महिलाओं को उनके अधिकार दिलवाकर उन्हें आगे के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि वह भी देश और समाज में अपना योगदान दे सके और देश का नाम रोशन कर सके! 

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