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LADKIYO KO BACHANA AUR SIKASHIT KARNA KYU JARURI HAI

Ladkiyo Ko Bachana Aur Sikashit Karna Kyu Jaruri Hai

LADKIYO KO BACHANA AUR SIKASHIT KARNA KYU JARURI HAI

लड़कियों को बचाना और शिक्षित करना क्यों जरूरी है
हम सब जानते है के बेटा और बेटी एक समान है। लड़कियाँ हर क्षेत्र में लड़कों के सामान हैं चाहें वह शिक्षा हो या सरहद पर डटी हुई सेना की लड़कियाँ हों। आज के इस आधुनिक युग में महिलाएं हर क्षेत्र में अपना कदम बढ़ा चुके हैं। आज कल्पना चावला जैसे महिलाएं पृथ्वी से बाहर जा कर लोगों को अंतरिक्ष का ज्ञान बाँट चुकी हैं।

आज हमारे 21वी सदी के भारत में जहां एक ओर चाँद पर जाने की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत की बेटियाँ अपने घर से बाहर निकलने पर भी कतरा रही हैं। जिससे यह पता लगता है कि आज का भारत देश पुरुष प्रधान देश है। लोगों की सोच इस कदर बदल गई है कि आए दिन देश में कन्या भ्रूण हत्या और शोषण जैसे मामले देखने को मिलते रहते हैं। जिसके कारण हमारे देश की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि दूसरे देशों के लोग हमारे भारत देश में आने से झिझकने लगे हैं।

जन्म के बाद भी लड़कियों को कई तरह के भेदभाव से गुजरना पड़ा जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, खान-पान, अधिकार आदि दूसरी जरुरतें है जो लड़कियों को भी प्राप्त होनी चाहिये। हम कह सकते हैं कि लड़कियों पर सख़्ती करने के बजाय उनका साथ देना चाहिए। लड़कियों को सशक्त बनाने और जन्म से ही अधिकार देने के लिये सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की। लड़कियों के सशक्तिकरण से सभी जगह प्रगति होगी खासतौर से परिवार और समाज में। लड़कियों के लिये मानव की नकारात्मक पक्षपात को सकारात्मक बदलाव में बदलने करने के लिये ये योजना के रस्ते खोले। ये संभव है कि इस योजना से लड़कों और लड़कियों के प्रति भेदभाव खत्म हो जाये तथा कन्या भ्रूण हत्या का अंत करने में ये मुख्य कड़ी साबित हो। इस योजना की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने डॉक्टर समुदाय को ये याद दिलाया कि चिकित्सा पेशा लोगों को जीवन देने के लिये बना है ना कि उन्हें खत्म करने के लिये।

कन्या भ्रूण हत्या के कारण-
 
बेटियों को गर्भ में ही मारने के बहुत से कारण है जिसके कारण वो इस जहाँ को देखने से वंचित रह जाती है।
मानसिकता-  लोगों की मानसिकता इस हद तक सिमट चुकी थी कि वो मानने लगे कि लड़कियाँ सिर्फ अगले घर जाने के लिए ही होती है। वंश को आगे बढ़ाने के लिए तो लड़का ही जरूरी है। इसी संकुचित मानसिकता के कारण भी बहुत से लोग लड़कियों को जन्म से पहले ही मार देते है।

दहेज़- कुछ लोग लड़की के बड़े होने पर उसकी शादी में होने वाले खर्च और दहेज़ से डर जाते है क्योंकि वो जानते है कि इस महँगाई के दौर मे वो दहेज़ देने में समर्थ नही हो सकेंगे। ज्यादातर गरीब लोग इसी कारण कन्या भ्रूण हत्या जैसा पाप करते हैं।

शारिरीक शोषण- रोज बलात्कार की खबरों से रंगे हुए अखबारों को देखकर लोग मजबूर हो जाते यह सोचने के लिए कि उनके घर लड़की पैदा ही न हों। इस वजह से भी कन्या भ्रूण हत्या बढ़ रही है।

बेटियों को कैसे बचाया जा सकता है;
नारी हर घर की नींव होती है। अगर बेटी नहीं होगी तो कोई भी घर , घर नहीं रहेगा। अगर बेटों के लिए बहुएँ चाहते हो तो बेटियों को बचाओ। उन्हें बहुत से तरीकों से बचाया जा सकता है-
  • सरकार द्वारा गर्भ में बच्चे की जाँच पर रोक लगाई है और जाँच की जानकारी पुलिस को देने वाले व्यक्ति को सरकार द्वारा  सम्मानित किया जाता है।
  • सरकार द्वारा दहेज़ लेना और देना दोनों पर ही रोक लगाई गई।
  • अगर अमीर लोग मिलकर गरीब लड़कियाँ की शादी करे तो कोई भी गरीब लड़कियाँ नहीं मारेगा।
  • सरकार ने लड़कियों के लिए जन धन योजना जैसी कई स़कीमें चलाई हैं\

बेटी बचाओ योजना
आजकल पूरे देश में लड़कियों को बचाने के संदर्भ में बेटी बचाओ योजना एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय है। लड़कियों को बचाने के लिये बहुत से प्रभावशाली उपायों को अपनाया गया है जिसमें काफी हद तक सफलता भी प्राप्त हुई है। समाज में बड़े स्तर पर गरीबी का प्रसार है जो भारतीय समाज में अशिक्षा और लिंग असमानता का एक बहुत बड़ा कारण है। इसके साथ ही हमें लोगो को जागरुक करके भी लैंगिग असमानता को दूर करने का प्रयास करना है। शिक्षा गहराई के साथ रोज़गार से जुड़ी हुई है। कम शिक्षा का अर्थ है कम रोज़गार जो समाज में गरीबी और लिंग असमानता का नेतृत्व करता है। महिलाओं की स्थिति में सुधार करने के लिये शिक्षा बहुत प्रभावी कदम है क्योंकि ये इन्हें वित्तीय रुप से आत्मनिर्भर बनाता है। समाज में महिलाओं के समान अधिकार और अवसरों को सुनिश्चित करने के लिये सरकार ने कन्या बचाओं कदम उठाया है।

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ द्वारा संदेश दिया जाता है कि हमें लड़कियों के महत्वों को समझना बहुत जरूरी है और उन्हें भी दुनिया में एक अच्छा सम्मान प्रदान करना चाहिए। इसके अलावा लड़का-लड़की को काबिलियत के नाम पर उन्होंने भेदभाव नहीं करना चाहिए। हमें लड़कियों को लड़कों के समान ही अवसर देने का मौका देना चाहिए, जिससे वह जीवन में बहुत आगे बढ़ सकें और दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना सकें।