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MAHILA SASAKTIKARAN KI AAJ KE SAMAY ME KYU AWASAYAKATA HAI

Mahila Sasaktikaran Ki Aaj Ke Samay Me Kyu Awasayakata Hai

MAHILA SASAKTIKARAN KI AAJ KE SAMAY ME KYU AWASAYAKATA HAI

महिला सशक्तिकरण की आज के समय में क्यों आवश्यकता है?
महिला सशक्तिकरण एक अभियान है। इसके अंतर्गत महिलाओं को जागरूक कर उनकी हर क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है। देश के आर्थिक प्रगति तथा सर्वांगिण विकास के लिए ये अति महत्वपूर्ण है। इससे उनके जीवन को भी एक उच्च स्तर मिलता है। जिससे अपने कैसे भी महत्वपूर्ण फैसले वे स्वयं ले सकती हैं। समाज में उन्हें अपनी पहचान मिलती है। महिला सशक्तिकरण को सरल शब्दों में कहा जाए तो, इससे महिलाओं को उनकी क्षमताओं से परिचित करवाया जाता है। ये एक पहल है उन्हें, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए। एक सशक्त समाज की रचना एवं देश को समृद्धशाली बनाने हेतु महिलाओं का पूरी तरह सक्षम होना सबसे जरूरी है। हमारा देश आज भी पुरुष प्रधान है। समाज में समानता से ही राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव है।

सशक्तिकरण की प्रक्रिया में औरतों को समाज के सभी रूढ़िवादी परंपराओं के प्रति जागरूक किया जाता है। रूढ़िवादिता में पितृसत्तामक सोच एक बड़ी वजह है, महिलाओं की समाज में दयनीय स्थिति की। सशक्तिकरण के दौरान भौतिक, आध्यात्मिक, शारीरिक अथवा मानसिक, सभी स्तर पर महिलाओं में आत्मविश्वास जाग्रत करना सबसे अहम होता है। इस कार्य में महिलाओं का शिक्षित होना अति आवश्यक है, ताकि वें अपने साथ दूसरी महिलाओं के अधिकारों को भी समझ सकें। अगर महिलाएं स्वयं एक-दूसरे को प्रोत्साहित करेंगी तो आधी समस्या स्वयं समाप्त हो जाएगी। इसके द्वारा वें सम्मान सहित अपने जीवन परिवार तथा समाज से जुड़े फैसले ले सकतीं हैं।

महिला सशक्तिकरणकेअधिकार
अपने वास्तविक अधिकारों के लिए सक्षम होना ही महिला सशक्तिकरण है। भारत में कई तरह की सामाजिक बुराईयाँ हैं महिलाओं के प्रति जैसे; दहेज़ प्रथा, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, यौन शोषण , लैंगिक भेदभाव, मानव तस्करी आदि कई ऐसी बुराईयाँ हैं जो उन्हें पीछे की ओर ढकेलता है। जिससे राष्ट्र में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक अंतर। इनका सही उपचार यही है कि महिलाओं को शिक्षित किया जाए ताकि ऐसी बुराईयों का सामना वें स्वयं कर पाएं। विश्व स्तर पर यूएनडीपी जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं तथा कई नारीवादी आंदोलनों आदि के द्वारा महिलाओं के सामाजिक समता, स्वतंत्रता, न्यायिक अधिकारों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 भारतीय संविधान के अनुसार महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। और लगातार महिलाओं की बेहतरी के लिए कई कानूनी अधिकार सरकार द्वारा संशोधित किए गए हैं। महिला-बाल विकास समिति इस क्षेत्र के संपूर्ण विकास की ओर कार्यरत है। हालांकि इन गंभीर मुद्दों का निवारण सबके लगातार प्रयास से ही संभव हो सकता है। इसमें महिलाओं के अपने एवं अपने जैसी औरतों के लिए उठाए गए ठोस कदम इस कार्य में कई मायनों में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ऐसा नहीं है की महिलाएं हमेशा ऐसी मजबूर रहीं हैं। महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी दुर्गावती, महारानी पद्मिनी जैसी कई वीरांगनाएं हुई हैं इस धरती पर जिन पर आज भी पूरे देश को गर्व है। जिनके अदम्य वीरता और साहस के समक्ष शत्रु भी नतमस्तक हुए जाते थे।

आर्थिकआत्मनिर्भर
महिलाओं की आर्थिक भूमिका की उपेक्षा की जाती रही जबकि सशक्तिकरण के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना परम आवश्यक है । और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के लिए महिलाओं का शिक्षित होना बेहद आवश्यक है लेकिन भारत में आज भी महिलाओं के लिए पर्याप्त शिक्षा व्यवस्था की कमी है । एक शिक्षित महिला ही इस महा अभियान का नेतृत्व कर सकती है । इसके अतिरिक्त नारी का स्वास्थ्य, समाज में व्याप्त यौन हिंसा, वेश्यावृति की बढ़ती घटनाओं को रोकना कारगर उपाय है ।

मुस्कान एनजीओ द्वारा सन्देश दिया जाता है कि महिलाओं को स्वयं अपनी महत्ता समझना सबसे अधिक जरूरी है। अतः महिला सशक्तिकरण का सफल होना अति महत्त्वपूर्ण है, किसी भी परिवार, समाज या राष्ट्र के लिए।

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