No One Has Ever Become Poor By Giving!

  • Phone:+91 9953659128
  • Email: info@muskanforall.com
Franchise Volunteer Donate Us

MAHILA SASAKTIKARAN ME UACH SIKCHA KI BHUMIKA

Mahila Sasaktikaran Me Uach Sikcha Ki Bhumika

MAHILA SASAKTIKARAN ME UACH SIKCHA KI BHUMIKA

महिला सशक्तिकरण में उच्च शिक्षा की भूमिका
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा की अहम भूमिका होती है। इसके माध्यम से घर परिवार, समाज तथा देश की सेवा करने का अवसर मिलता है। महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका पर एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। महिला सशक्तिकरण एक ऐसा मुद्दा है ।  यह अच्छी तरह से जाना जाता है कि हमारे देश की जनसंख्या का आधा हिस्सा महिलाएं हैं। जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को स्वीकार किया गया है क्योंकि महिला एवं पुरूष विकास रूपी गाड़ी के दो पहिए है।

महिलायें राष्ट्र के विकास में उतना ही महत्व रखती हैं जितना कि पुरूष। अतः देश का समग्र विकास महिलाओं की भागीदारी के बगैर संभव नहीं है। भारतीय महिलाओं ने देश दुनिया के विभिन्न क्षेत्र में अपना सम्मानित स्थान बनाया है। आज महिलाएं बेहतर रोज़गार के लिए दुनिया के किसी भी कोने में जाने के लिए तैयार है। आज ऐसा कोई क्षेत्र नही जहां महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज न कराई हो।

स्वतंत्रता के बाद से सरकार द्वारा कई प्रकार की संस्था और योजनाएं चलाई गयी. कहीं शिक्षा से जुड़ी तो कहीं अधिकारों से जुड़ी और हर जगह महिलाएं पुरुष को बराबर की मात देती हुई आई हैं। चाहें वो खेल कूद हो या शिक्षा। कई महिलाओं ने तो विश्व में अपने देश का नाम भी रौशन किया है.

लेकिन अभी भी कुछ जगह ऐसी हैं जहाँ शिक्षा की कमी है. कुछ समय के पहली की जनगणना में पता चला की अभी अशिक्षित लोगों में बहुत लोग हैं और उनमें 65% लड़कियाँ हैं जहाँ शहर की शिक्षित महिला जनसंख्या 72.99 प्रतिशत और गाओं की 45.50 प्रतिशत है. इसका मतलब अभी भी 50 प्रतिशत महिलाएं अशिक्षित हैं.

वही प्राथमिक शिक्षा के लिए आने वाली लड़कियों का 24.82 प्रतिशत जो अपनी पढ़ाई पांचवी के आगे पूरी नहीं कर पाते है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 50.76 प्रतिशत लड़कियों को घरेलू समस्याओं के कारण स्कूल छोड़ना पड़ जाता है। स्कूल का दूर होना, यातायात की अनुपलब्धता, घरेलू काम, छोटे भाई-बहनों की देखरेख, आर्थिक व विभिन्न सामाजिक समस्यायें आदि, महिलाओं को अपनी शिक्षा को पूरा करने के लिए इन सभी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है।

इसलिए शिक्षा पे भी पूरा ध्यान देते हुए आजकल गावों में ही स्कूल का निर्माण हो रहा है जिससे लड़कियों को दूर न जाना पड़े और वो सभी काम के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी कर सके क्योंकि ये इनके लिए बहुत कारगर साबित होगा आगे चल के जैसे:

  • यदि महिला शिक्षित होगी तो वो अपने अधिकार को अच्छे से जानकारी हासिल कर पायेगी।
  • वो बाहर जा कर अपने पति के बराबर खड़े हो के काम करने में सक्षम हो सकती है।
  • उसे घर और बाहर अपने अधिकारों के लिए लड़ने में कोई समस्या नहीं होगी।
  • वो अपने पैरों पे खड़े हो के पुरुष के बराबर कमा सकती है।
  • यदि कोई उसका शोषण करने की कोशिश करे तो उसे अपनी सहायता कैसे करनी है ये पता होगा।
  • समाज को आगे बढ़ाने में शिक्षित महिला अपना पूरा सपोर्ट दे पायेगी।
  • उसी अपने पति पे निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
  • यदि वो पढ़ी लिखी होगी तो वो अपने घर में और लोगों को भी अच्छे संस्कार और शिक्षा देने में कारगर होगी।
  • शिक्षित महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं देनी होती है. उन्हें हर चीज पहले से ही पता होती है।
  • शिक्षित महिला के अंदर आत्मविश्वास खुद व खुद आ जाता है और वो सभी कार्यों को अच्छे से करने में सहायक होती है।
  • यदि महिला शिक्षित है तो वो और महिलाओं को उनका अधिकार समझाने में सहायक होगी, जिससे सभी जागरूक होंगे और देश और महिला दोनों आगे बढ़ेंगे।

निष्कर्षतः

महिलाएं समाज का अनिवार्य अंग है। सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक क्षेत्र के साथ-साथ राजनीति के क्षेत्र में उनकी अहम भूमिका है। जैसे-जैसे शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में राजनीति जागरूकता आ रही है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार और बदलते सामाजिक प्रवेश में राजनीति में महिलाएँ आगे आ रही है और केन्द्रीय, प्रांतीय, स्थानीय शासन में अपनी भागीदारी निभा रही है। इसलिये महिलाओं को सशक्त और सुदृढ़ बनाने पर ही समाज सुदृढ़ होगा। महिलाओं को सुदृढ़ करने के लिये उनका शिक्षित होना आवश्यक है ताकि अपने अधिकारों को समझ कर समाज एवं राष्ट्र का विकास कर सके।