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NASHA KHORI KI SAMASHYA BHARAT ME

nasha khori ki samashya bharat me

NASHA KHORI KI SAMASHYA BHARAT ME

नशाखोरी की समस्या – भारत में
आज के आधुनिक समय से लोग नशे करने के अदि होते जा रहे है। वह शराब ,सिगरेट ,तंबाकू चरस आदि नशीले पदार्थों का नशे ने हमारे पुरे देश को घेरा हुआ है और लोगों की ज़िंदगी में अंधेरा कर दिया है। ज्यादातर नशे का सेवन युवाओं में देखा जाता है क्योकि वह विदेशी की संस्कृति को अपनाना चाहते है। वह नशा करने को फैशन समझते है और गर्व महसूस करते है। इसकी वजह से देश के युवा अंधकार में है और देश का भविष्य सुरक्षित नहीं है।

 इस युग में लगभग सभी लोग तनाव से गुज़र रहे हैं। आप जहाँ कहीं भी देखा जाये सभी को कोई न कोई समस्या है। ये तनाव आज सबसे ज्यादा नव युवकों में देखने को मिलता है। वे अपने करियर को लेकर इतने गंभीर होते हैं कि तनाव ग्रस्त हो जाते हैं। नशे के सेवन से अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है.

 राजस्थान में भी नशे की गम्भीर समस्या है राजस्थान में मुख्य रूप से डोडा पोस्त (Doda Post) ,अफीम (Opium) व अफीम से बने नशीले पदार्थो का सेवन किया जाता हैं।

नशे के दुष्प्रभाव
नशे का सेवन करने वाले व्यक्ति न केवल व्यक्तिगत रूप से प्रभावित होते है बल्कि इससे उसका पूरा परिवार तथा समाज प्रभावित होता है. ड्रग्स की लत न केवल व्यक्ति को शारीरिक रूप से अपंग बना देती है बल्कि उसकी मानसिक क्षमताओं को भी बुरी तरह प्रभावित करती है. नशे का गुलाम व्यक्ति तब तक जीता है, अपने आप पर, अपने परिवार तथा देश पर एक बोझ की तरह जीता है. नशे की लत लग जाने पर नशा प्राप्त करने के लिए व्यक्ति चोरी चकारी करता है तथा जरूरत पड़ने पर बड़े अपराधों को भी अंजाम दे देता है. ड्रग्स माफिया नशे के आदि व्यक्तियों को कैरियर के रूप में काम में लेते है. तथा उनके माध्यम से ड्रग्स की तस्करी करवाते है वे खुद कभी भी कानून की पकड़ में नही आते है जबकि ड्रग्स का आदि व्यक्ति केवल नशे की पूर्ति के लिए सभी अनैतिक कार्य करने के लिए विवश होता है और इसका परिणाम स्वयं व उसका पूरा परिवार भुगतता हैं।

भारत में नशाखोरी बढ़ने के कारण
एक आंकलन के अनुसार भारत की आधे से ज्यादा संपदा केवल 50 लोगों के हाथो में है. अमीर और अमीर होता जा रहा है तथा गरीब के लिए अपने परिवार को चलाना ही एक चुनौती है. गरीब लोगों के पास अपने परिवार को मूलभूत सुविधाएं दे पाना मुश्किल हो गया है. गरीब व्यक्ति बड़ी मुश्किल से अपने परिवार को दो समय का भोजन दे पाता है। अच्छी शिक्षा उपलब्ध करवाना तो बहुत दूर की बात है. ऐसी स्थति में गरीब व्यक्ति तनाव व अवसाद में रहता है जिसके चलते कई बार अपने आपकों तनाव से मुक्त करने के लिए ड्रग्स का सहारा लेता है और धीरे धीरे इसका आदि हो जाता है।

नशाखोरी की को रोकने के तरीके
नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कानूनी सेवा संगठनों की सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी है। कानूनी सेवाओं के संगठनों को दवा की रोकथाम के लिए एक ठोस योजना विकसित करने के लिए सरकारी एजेंसियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। जिसके तहत आम जनता को ड्रग्स की रोकथाम और समाज पर इसके प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रित करने वाले कानूनों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

मुस्कान एनजीओ द्वारा सन्देश देता है कि नशीली दवाओं की रोकथाम के लिए, हम सभी को अपने सभी प्रयासों से सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है, समान प्रयासों को समाप्त करना संभव नहीं है। सभी सरकारी एजेंसियों और कानूनी सेवा संगठनों को इस बुराई पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने चाहिए। तभी नशा मुक्त भारत का सपना साकार होगा।

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