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OUR SOCIETY - सामाजिक प्रथा (Society)

OUR SOCIETY - सामाजिक प्रथा (Society)

व्यक्तियों के आपसी सम्बन्धों से समाज बनता है । व्यक्ति परिवार की इकाई है । परिवार एक आवश्यकता है तथा समाज एक संगठन है । पारस्परिक निर्भरता के कारण सामाजिकता का गुण मनुष्य में स्वभाव से है । मनुष्य सामाजिक प्राणी है अत: समाज से पृथक रहकर वह अपनी आवश्यकताओं व हितों की पूर्ति नहीं कर सकता । समाज एक व्यवस्था है इसकी एक संरचना होती है । समाज के अपने संस्कार एवं शिक्षा होती है । बदलती परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं के कारण समाज की मान्यताओं में परिवर्तन होता  जा रहा है।

हमारे समाज में अभी भी जातीय संकीर्णता, छुआछूत व्याप्त है । स्त्रियों को पुरूषों के समान स्थिति प्राप्त नहीं हो सकी है । इसके अतिरिक्त अन्य समस्याएं जैसे बाल-विवाह, मृत्युभोज, भिक्षावृत्ति, नशीले पदार्थों का सेवन, दहेज प्रथा आदि विद्यमान है ।

प्रमुख सामाजिक समस्याएं:

प्रमुख सामाजिक समस्याएं:

हमारे देश के विकास में कुछ सामाजिक समस्याएं बाधक हैं । इनमें से प्रमुख हैं: साम्प्रदायिकता, भाषावाद, जातिवाद, पृथकतावाद, शिक्षा का अभाव, परिवार में महिलाओं की स्थिति एवं नशीले पदार्थों का सेवन, बालश्रम इन समस्याओं के विषय में है ।

1. शिक्षा का अभाव:लोकतांत्रिक राज्य के लिए शिक्षा अति आवश्यक है । शिक्षित नागरिक लोकतंत्र के विकास में सहायक होते हैं । शिक्षित व्यक्ति विभिल सामाजिक बुराईयों से स्वयं दूर रहता है तथा अन्य व्यक्तियों को भी इस हेतु प्रेरित करता है । सरकार निरक्षरों को साक्षर बनाने हेतु प्रयासरत हैं । नई-नई योजनाओं द्वारा बच्चों को पढ़ने हेतु स्कूल लाने का प्रयत्न किया जा रहा है । इसलिये हमें इस देश से अज्ञानता और अशिक्षा को समाप्त करना है ।

2. परिवार में महिलाओं की स्थिति:हमारे प्राचीन ग्रंथों एवं धर्मशास्त्रों में नारी को समुचित स्थान दिया गया है । कालान्तर में महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार होने लगा । महिलाओं के क्रिया-कलाप घर-गृहस्थी तक सीमित हो गए । इनके द्वारा घर में भोजन पकाना, बच्चों की देखभाल करना, खेतों में काम करना, ईंधन एकत्रित करना जैसे कार्य किये जाने लगे । वर्तमान में शहरों में तो जहाँ महिलाओं द्वारा पुरूषों के द्वारा किये जाने वाले कार्यों को भी किया जा रहा है फिर भी उन्हें घर में बच्चों की देख- भाल, भोजन बनाना जैसे कार्य करना अनिवार्य समझा जाता है ।

Our Society

3. नशीले पदार्थों का सेवन:मद्यपान एवं धूम्रपान भी एक सामाजिक बुराई हैं । भारत जैसे विकासशील देशों में ये आदतें परिवारों का विघटन कर रही हैं । नशे के आदी व्यक्ति घर पर बच्चों एवं महिलाओं पर अत्याचार करने लगते हैं । इससे घर की शांति भंग होती है, आर्थिक तंगी भी बढ़ती हैं। विभिन्न प्रकार के पान मसाले गुटका पाउचों के रूप में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इनका सेवन बढ रहा है । नशा मुक्ति केन्द्र एवं आध्यात्मिक प्रवचन इसमें बहुत सहायक हो रहे हैं । नशे की बुरी आदत के कारण अपराध बढ रहे है चारित्रिक गिरावट आ रही है ।

4. बालश्रम:बच्चे इस देश का भविष्य हैं । भावी नागरिक होने के नाते बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त हैं । इतना ही नहीं उनके लिये भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य, शिक्षा व खेल कूद की भी व्यवस्था होनी चाहिये ताकि वे मजबूत और सुदृढ़ भारत का निर्माण कर सकें।

अत: इनके विकास के लिए राज्य द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है ।

  • भारत के संविधान में इनके हितों व अधिकारों का उल्लेख किया गया है । अस्पृश्यता को अपराध घोषित किया गया है ।
  • संविधान द्वारा इन वर्गो को संरक्षण प्रदान किया गया है ।
  • लोक सभा, विधान सभाओं, स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं में इनकी जनसंख्या के आधार पर स्थान आरक्षित किये गए है ।