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PEDO KO KATNE SE KIS PRAKAR KI HANIYA HO SAKTI HAI

Pedo Ko Katne Se Kis Prakar Ki Haniya Ho Sakti Hai

PEDO KO KATNE SE KIS PRAKAR KI HANIYA HO SAKTI HAI

पेड़ों को काटने से किस प्रकार की हानियां हो सकती हैं!
जनसँख्या वृद्धि के कारण आज के समय में जंगलों का विनाश बढ़ गया हैं! लोग इन बातों को नहीं समझते कि पेड़ों से हमारी जिंदगी हैं, क्योकि पेड़ ही हमें ऑक्सीजन देते हैं, जो हमारे जीने के लिए बहुत ही जरूरी हैं! पेड़ों और जंगलों द्वारा कई जरूरतों को पूरा किया जा सकता हैं, जंगलों के कारण ही बारिश होती हैं, लेकिन बढ़ती जनसंख्या के कारण मनुष्य अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अंधाधुंध जंगलों का विनाश कर रहा है। यही कारण हैं कि जंगलों की संख्या खत्म होती जा रही हैं और इसके साथ ही मानव जीवन भी खतरे में हैं! एक अनुमान के अनुसार दुनिया में हर साल 1 करोड़ हेक्टेयर इलाके के वन काटे जाते हैं। बड़े-बड़े शहरों, बढ़ती आबादी और तेजी से होने वाले विकास ने हमारी हरी-भरी जिंदगी को खत्म कर दिया हैं!

वृक्ष काटने से दुष्प्रभाव
1) बाढ़ और सूखा                                                                                                                                            वनों की काटने की वजह से भूमि का क्षरण होता हैं क्योकि पेड़ पहाड़ियों की सतह को बनाये रखते हैं! अगर पेड़ों को काटने की वजह से तेजी से बढ़ती बारिश के पानी में प्राकृतिक बाधाएं पैदा हो सकती हैं, और नदियों का जल स्तर अचानक बढ़ जाता है और बाढ़ आ जाती हैं! इसी तरह मिट्टी का कटाव मिट्टी के प्रवाह को बढ़ाता हैं जिसके कारण बाढ़ और सूखे की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं!

2)
मिट्टी की उपजाऊ शक्ति की हानि
जब ईंधन की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं होती तो गाय का गोबर और वनस्पति अवशेषों को ईंधन के रूप में भोजन बनाने के लिए उपयोग में लिया जाता है। इसी तरह पेड़ों के हर हिस्से को धीरे-धीरे इस्तेमाल कर लिया जाता हैं और मिट्टी को पोषण नहीं मिल पाता! इस प्रक्रिया को बार-बार करने से मिट्टी की उत्पादकता प्रभावित होती है और यह मिट्टी-उर्वरता के क्षरण का कारण बनता है। वनों की कटाई कर देने से जमीन के ऊपर की उपजाऊ मिट्टी बारिश के पानी के साथ उन जगहों पर बह जाती हैं जहां इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता हैं!

3)
वायु प्रदूषण
पेड़ों को काटने से बहुत ही गंभीर परिणाम सामने आते हैं इसका सबसे ज्यादा असर वायु पर पड़ता हैं! जहाँ पर पेड़ों की संख्या कम होती हैं वहां वायु प्रदूषित हो जाती हैं इसी कारण से शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या बहुत ज्यादा हैं और लोग अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं!

4)
ग्लोबल वार्मिंग
पेड़ों के कट जाने का सीधा प्रभाव प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन पर पड़ता हैं जिससे वैश्विक तापमान बढ़ने लगता हैं! पेड़ों की संख्या में कमी से बारिशों में भी कमी आ जाती हैं और 'ग्लोबल वार्मिंग' में इजाफा होता है जिसका सीधा प्रभाव मनुष्यों पर पड़ता हैं!

5)
जल संसाधन में कमी
नदियों के किनारे और पहाड़ों पर पेड़-पोधो की अंधाधुंध  कटाई के कारण आज नदियों का पानी कम गहरा और प्रदूषित हो रहा हैं! इस वजह से वर्षा भी कम हो रही हैं जिससे जल स्रोत दूषित हो रहा है और पर्यावरण भी प्रदूषित और सांस लेने में घातक साबित हो रहा है।

निष्कर्ष
आज जंगलों को अंधाधुंध रूप से काटा जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप मौसमी परिवर्तन, मिट्टी में गर्मी, ओजोन परत की कमी आदि में वृद्धि हो रही है। इस महत्वपूर्ण स्थिति में पेड़ों की रक्षा करना न केवल हमारा कर्तव्य होना चाहिए बल्कि हमारा धर्म भी होना चाहिए। हम सब पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकने की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए और पेड़ों को बचाने में एक अमूल्य योगदान करना चाहिए। मुस्कान एनजीओ की टीम भी इन सब कामों में बहुत मेहनत कर रही हैं और लोग भी इनके द्वारा किये गए कामों से प्रभावित हो रहे हैं!

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