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PRADUSHAN KE KARAN AUR ISKO ROKANE KE UPAY

Pradushan Ke Karan Aur Isko Rokane Ke Upay

PRADUSHAN KE KARAN AUR ISKO ROKANE KE UPAY

प्रदूषण के कारण और इसको रोकने के उपाय
प्रदूषण आज के समय में एक चुनौती बन चुका है क्योंकि इसके कारण लोग अपने जीवन में कई तरह के ख़तरों को सामना कर रहे है। औद्योगिक कार्यों और कई अन्य माध्यमों से निकलने वाले कचरे के कारण वायु, जल और भूमि जैसे हमारे प्राकृतिक संसाधन दिन-प्रतिदिन और भी ज्यादे प्रदूषित होते जा रहे है। यह जल, वायु और भूमि में मिलने के बाद मानव तथा अन्य जीव जंतुओं के स्वास्थ्य को प्रत्यक्ष रुप से प्रभावित करते है। जिससे की हमारे स्वास्थ्य पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो जाते है।

शहरों में प्रदूषण
वाहनों और यातायात साधनों के कारण शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों के अपेक्षा प्रदूषण स्तर काफी ज्यादे है। उद्योगो और कारख़ानों से निकलने वाले धुएँ के कारण शहरों में स्वच्छ वायु की गुणवत्ता काफी खराब हो चुकी है और यह वायु अब हमारे सांस लेने योग्य नही है। इसके अलावा जब सीवेज, घरेलू कचरा और उद्योगों तथा कारख़ानों से निकलने वाला कचरा जब नदियों, झरनों और समुद्र के पानी में मिल जाता है तो यह पानी को जहरीला और अम्लीय बना देता है।

गावों में प्रदूषण
हालांकि गावों में शहरों के अपेक्षा प्रदूषण का स्तर काफी कम है लेकिन तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण के कारण अब गावों का स्वच्छ वातावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है। बढ़ते यातायात संसाधनों और कीटनाशकों के कारण गावों में वायु और भूमि की गुणवत्ता काफी प्रभावित हुई है। इसके कारण भूजल भी दूषित हो गया है, जोकि आज के समय में कई बीमारियों का कारण बन गया है।

प्रदूषण के मुख्य कारण
पेड़ो को काटना
पर्यावरण प्रदूषण के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक पेड़ो का लगातार काटा जाना भी है। दिन-प्रतिदिन पेड़ो की घटती संख्या के कारण पर्यावरण में ज़हरीली गैसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि पेड़ो द्वारा वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण किया जाता है और ऑक्सीजन उत्सर्जित किया जाता है।

कीटनाशक
किसान फ़सलों की उर्वरकता बढ़ाने के लिए काफी ज्यादे मात्रा में कीटनाशक का इस्तेमाल करते है, जिसके कारण जलीय स्रोतों में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ जाती है। जब इस पानी का उपभोग किया जाता है तो इसके कारण कई सारी बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती है।

प्रदूषण की रोकथाम के उपाय
वायु प्रदूषण को रोकने के लिए नहीं अधिक मात्रा में पेड़ लगाने चाहिए साथ ही जहां पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है वहां पर रोक लगानी चाहिए। वायु प्रदूषण को फैलाने वाले उद्योग धंधों को नई तकनीक अपनानी चाहिए जिससे कम प्रदूषण हो।

जल प्रदूषण को कम करने के लिए हमें साफ सफाई की ओर अधिक ध्यान देना होगा हम नदियों तालाबों में ऐसे ही कचरा डाल देते है। जल प्रदूषण के लिए जो भी फ़ैक्टरियों और कारखाने जिम्मेदार है उनको बंद कर देना चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण अधिकतर मानव द्वारा ही किया जाता है इसलिए अगर हम स्वयं हॉर्न बजाना बंद कर दें और मशीनों की नियमित रूप से अगर देखभाल करें तो उन से आवाज़ नहीं आएगी और ध्वनि प्रदूषण में कमी आएगी।

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ हमें बताते है कि आज हर प्रकार का प्रदूषण हमारे लिए काफी खतरनाक होता जा रहा है और हमें इसके काफी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।वह हमें संदेश देते हैं कि इस सबको देखते हमें पर्यावरण का ध्यान रखने की आवश्यकता है ताकि हम प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाये रख सके। इस समस्या से निपटने के लिए हम सबको संयुक्त प्रयास करने की आवश्यकता है, जिससे हम पृथ्वी पर स्वच्छ और अप्रदूषित वातावरण बनाये रख सके। इस प्रदूषण को रोककर हम अपने ग्रह पर निवास करने वाले कई सारे मासूम जीवों के लिए वातावरण को उनके अनुकूल बनाकर उन्हें बचा पायेंगे।