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PRADUSHAN KO KITNE BHAGO ME BANTA GYA HAI

Pradushan Ko Kitne Bhago Me Banta Gya Hai

PRADUSHAN KO KITNE BHAGO ME BANTA GYA HAI

प्रदूषण को कितने भागों में बांटा गया हैं?
हमारे वातावरण में कभी-कभी हानिकारक घटकों का प्रवेश हो जाता हैं, जिसके कारण हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो जाता हैं! और यही प्रदूषित पर्यावरण धरती पर रहने वाले जीवों के लिए हानिकारक होता हैं! यह प्रदूषण हवा, पानी, मिट्टी और वायुमंडल आदि सभी को प्रभावित करता हैं! इसे ही  ‘पर्यावरण प्रदूषण’ कहा जाता हैं! हमारे लिए प्रदूषण एक प्रकार का जहर ही हैं, जो हवा, पानी, धूल आदि के साथ मिलकर मनुष्य के शरीर में  बीमारियों को जन्म देता हैं और साथ ही यह जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और वनस्पतियों को नष्ट कर देता हैं! कैंसर, तपेदिक, रक्तचाप, शुगर, एंसीफिलायटिस, स्नोलिया, दमा, हैजा, मलेरिया, चर्मरोग, नेत्ररोग और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां प्रदूषण के कारण ही होती हैं!

प्रदूषण के प्रकार
1) वायु प्रदूषण
हमारा वायुमंडल अनेक प्रकार की गैसों का मिश्रण हैं, तथा इसमें विभिन्न घटकों में रासायनिक, मौलिक और जैविक गुणों में परिवर्तन होते रहते हैं, जो जैवमंडल को दुष्प्रभावित करते हैं, तथा वायु के इस प्रकार प्रदूषित होने को ही वायु प्रदूषण कहा जाता हैं!

2)
जल प्रदूषण
इस पृथ्वी पर जीने के लिए जल की बहुत जरूरत होती हैं क्योकि जल से ही जीवन हैं! हमारे शरीर का लगभग 70%भाग पानी का बना हुआ हैं! इसीलिए हम जल को शुद्ध रूप में प्राप्त करना चाहते हैं! आज विश्व की जनसंख्या में वृद्धि हो रही हैं और इसी के चलते शहरों और औद्योगिक इकाइयों में भी वृद्धि हो रही हैं, जिससे इनके द्वारा कई प्रकार के हानिकारक पदार्थ जल के साथ ही बहा दिए जाते हैं जो नदी, तालाबों और समुन्द्रों आदि में मिलकर जल को दूषित कर देते हैं! जिसे जल प्रदूषण कहा जाता हैं!

3)
ध्वनि प्रदूषण
आजकल विज्ञानं ने बहुत ही प्रगति कर ली हैं, जिसके कारण मोटर गाड़ियों, स्वचालित वाहनों, लाउडस्पीकरों, टैक्टरों, कल-कारखानों एवं मशीनों का बहुत अधिक उपयग होने लगा हैं! ये सभी उपकरण और मशीनें अवांछित ध्वनि उत्पन्न करते हैं जिसे शोर प्रदूषण भी कहा जाता हैं! क्योकि मनुष्य की श्रवण क्षमता सिर्फ  80 डेसिबल होती है, और मनुष्य की क्षमता से ज्यादा आवाज उनके लिए हानिकारक हो सकता हैं!

4)
मृदा प्रदूषण
मृदा पृथ्वी की सबसे उपजाऊ परत होती हैं, जिस पर पीढ़ी उगाये जाते हैं! पौधों के लिए यह मृदा बहुत जरूरी होती हैं, क्योकि पौधे मृदा द्वारा ही जल और खनिज लवण ग्रहण करते हैं! जनसँख्या में वृद्धि के कारण और शहरों और औद्योगीकरण में विकास के कारण इनके अनुपयोगी पदार्थों ने मृदा को प्रदूषित कर दिया हैं! जसिके कारण मृदा की उपजाऊ शक्ति कम होने लगी हैं और जीव-जंतुओं पर भी बुरा असर होने लगा हैं! विभिन्न प्रकार की कीटनाशक दवाएं भी मृदा को प्रदूषित करते हैं!

5)
तापीय प्रदूषण
कोयले को जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, फ्लाइऐश, सल्फर एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड तथा हाइड्रोकार्बन इत्यादि जैसी गैसें निकलती हैं जो वातावरण को प्रदूषित करती हैं, और प्रदूषण फैलती हैं जिसे ताप प्रदूषण कहा जाता हैं! जब ताप प्रदूषण का उपयोग किया जाता हैं उसके बाद कुछ पदार्थों से ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसके  कारण पर्यावरण का ताप बढ़ जाता हैं इसे ही तापीय प्रदूषण कहते हैं।

6)
समुद्रीय प्रदूषण
समुन्द्रों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हानिकारक पदार्थों का मिलना जिससे समुद्र की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़े और मानव और जीव-जंतु के लिए संकट उत्पन्न हो, और कूड़ा-कचरा, भारी धातुएं, प्लास्टिक पदार्थ, पीड़कनाशी, रेडियोधर्मी पदार्थ, पेट्रोलियम पदार्थ इत्यादि के समुद्र में आने से समद्रीय वातावरण प्रदूषित हो जाता है, जिसे समुद्रीय प्रदूषण कहा जाता हैं!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ की टीम ने प्रदूषण से बचने के लिए कई कार्य किये हैं और अगर हम सब भी इस टीम का साथ दे तो हम देश को प्रदूषण मुक्त बना सकते हैं, परन्तु इसके लिए हमें समाज के साथ की जरूरत होगी! अगर सभी लोग मिलकर प्रदूषण को खत्म करने की कोशिश करेंगे तो तभी हमारा देश साफ़ और स्वच्छ रहेगा!