No One Has Ever Become Poor By Giving!

  • Phone:+91 9953659128
  • Email: info@muskanforall.com
Franchise Volunteer Donate Us

Blog Details

Siksha ka samaj me mahatav

शिक्षा का समाज में महत्व

शिक्षा समाज का आईना होता है। यह समाज में उच्च आदर्श स्थापित करने वाला व्यक्तित्व होता है। किसी भी देश या समाज के निर्माण में शिक्षा की हम भूमिका होती है।शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही पूज्यनीय रहा है। कोई उसे गुरु कहता है , कोई शिक्षक कहता है, कोई 'आचार्य' कहता है ,' अध्यापक' या 'टीचर' ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित लगते है ,जो सभी को ज्ञान देता है। सिखाता है और जिसका योगदान किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है।

हम सभी अपने बच्चों को सफलता की ओर जाते हुए देखना चाहते हैं, जो केवल अच्छी और उचित शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। सभी अभिभावक अपने बच्चों को बचपन से ही जीवन में शिक्षा के महत्व और शिक्षा के लाभों के बारे में बताते हैं, ताकि वे उनका ध्यान भविष्य में बेहतर शिक्षा की ओर कर सकें। बेहतर शिक्षा सभी के लिए जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है। यह हममें आत्मविश्वास विकसित करने के साथ ही हमारे व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायता करती है। स्कूली शिक्षा सभी के जीवन में महान भूमिका निभाते है। पूरे शिक्षा तंत्र को प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और उच्च माध्यमिक शिक्षा जैसे को तीन भागों में बाँटा गया है

 

1.शिक्षा और समाज की भौगोलिक स्तिथि पर नियंत्रण

एक वक्त था जब मनुष्य को भौगोलिक परिस्तिथियों का दास कहा जाता था। परन्तु आज मनुष्य शिक्षा के द्वारा अपने भौगोलिक स्तिथियों पर हवाई जहाज़ों का निर्माण  संभव हुआ और हवाई जहाज़ों से उड़कर हम नदी और पहाड़ हर ही नहीं कर सकते। शिक्षा के द्वारा हम हर भौगोलिक इस परिस्थिति पर नियंत्रण करने में सफल होते जा रहे है।

 

2. शिक्षा और समाज का स्वरुप

 शिक्षा के द्वारा ही मनुष्य अपने समाज के संसार के ,और इस संपूर्ण ब्रह्मांड के , बारे में जानकारी प्राप्त करता है। इस ज्ञान के आधार पर ही अपने जीवन के उद्देश्य निश्चित करता है। इन उदेश्यों की प्राप्ति के लिए वह भिन्न भिन्न समाजों का निर्माण करता है। शिक्षा एक और समाज के स्वरूप की रक्षा करती है और दूसरी और उसमे आवश्यक परिवर्तन करती है।

शिक्षा का समाज में महत्व 

3. शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन

समाज शिक्षा में परिवर्तन करता है ह और शिक्षा द्वारा सामाजिक परिवर्तन होता है। शिक्षा द्वारा मनुष्य अपनी जाति की भाषा,रहन-सहन , खान-पान के तरीके औरत रीति-रिवाज सीखता है। और उसके मूल्य एवं मान्यताओं से परिचित होता है। इससे उसका मानसिक विकास होता है और वह अपने समाज के तथा इस भाह्मांड के बारे में सदेव सोचता।  समाज में रह कर वह नए नए अनुभव प्राप्त करता है और समाज की आवश्यकता एवं समस्याओं से परिचित होता है

 

 हम जानते है कि समाज परिवर्तनशील है। संसार का इतिहास इस बात का साक्षी है कि समाज के साथ-साथ शिक्षा का स्वरूप भी बदलता है। मुस्कान एनजीओ द्वारा संदेश दिया जाता है कि आज शिक्षा का बहुत ही महत्व बढ़ गई है और आध्यात्मिक पक्ष निर्बल पड़ गया है। इसलिए शिक्षा और समाज में विज्ञान एवं तकनीकी को अधिक महत्व दिया जाने लगा है।