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VAYU PRADUSHAN KE PRAKAR

Vayu Pradushan Ke Prakar

VAYU PRADUSHAN KE PRAKAR

वायु प्रदूषण के प्रकार
जनसँख्या में वृद्धि होने से प्रदूषण में भी काफी तेजी से वृद्धि होने लगी हैं! प्रदूषण चाहे किसी भी वजह से हो, मनुष्य के स्वास्थ्य को बहुत नुक्सान पहुंचता हैं! प्रदूषण की वजह से ही आजकल कैंसर, शुगर, अस्थमा और दिल की बीमारी जैसी बीमारियों से लोग परेशान हैं! मानवों द्वारा अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राकृतिक सौंदर्य को खत्म किया जा रहा हैं!
आज के समय में प्रदूषण मानव के शरीर के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा हैं! हवा में प्रदूषण का कारण उड़ती हुई धूल हैं! कारखानों और जंगलों में आग लगने की वजह से उनके हानिकारक कण हवा में मिल जाते हैं जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता हैं! जंगलों में आग लगने की वजह से जंगल जलकर राख हो जाते हैं और यही राख हवा में मिल कर प्रदूषण फैलाती हैं! इसी प्रकार जनसँख्या के बढ़ने से लोगों को स्कूटर, कार आदि का उपयोग करना पड़ता हैं, और इनसे निकलने वाला धुआं पर्यावरण को दूषित करता हैं!

वायु प्रदूषण के निम्न प्रकार हैं;
1) घरेलू प्रदूषक
मुख्य रूप से खाना बनाने, घर को गर्म रखने तथा घर में रौशनी की व्यवस्था करने के लिए ईंधन को जलाने से घरेलू वायु प्रदूषण होता हैं! घरेलू कारणों से होने  वाले प्रदूषण के कारण हर साल दुनिया में 38 लाख मौतें होती हैं!193 देशों में से, 97 देशों ने 85 प्रतिशत से अधिक घरों में लोगों ने कम प्रदूषण फैलाने वाला ईंधन उपयोग में लाना शुरू किया हैं! लेकिन आज भी कई लोग इन सब के लिए खुली आग का प्रयोग करते हैं! कम प्रदूषण वाले ईंधन को अपनाकर बीमारियों को कम किया जा सकता हैं और बहुत सी जानें बचाई जा सकती हैं!

2)
उद्योग
वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्त्रोत ऊर्जा उत्पादन भी हैं! आज कोयले से चलने वाले बिजली सयंत्र वायु प्रदूषण को बढ़ा रहे है उसी प्रकार डीजल जनरेटर भी वायु प्रदूषण को बढ़ाकर चिंता का विषय बने हुए हैं! रासायनिक और खनन उद्योगों में होने वाली औद्योगिक प्रक्रियाएं और काम आने वाले साल्वेंट भी वायु को प्रदूषित करते हैं। उत्पादन बढ़ाने के उदेश्य से नए स्त्रोतों से प्राप्त ऊर्जा दक्षता भी देश की वायु गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव डालती हैं!

3)
परिवहन
कार्बन डाई ऑक्साइड गैंस भी वायु को प्रदूषित करने में जिम्मेदार है और यह लगातार बढ़ता ही जा रहा हैं! परिवहन से उत्पन्न हुए वायु प्रदूषण से होने वालीं मौतों में से आधी से ज्यादा मौते डीजल के उत्सर्जन के कारण होती हैं! अगर वाहनों से हो रहे उत्सर्जन को कम किया जाए तो यह वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम होगा! कम प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों का उपयोग करके तथा वाहन उत्सर्जन को कम करने वाली नीतियों को अपनाकर वाहन उत्सर्जन को 90% तक या उससे भी कम किया जा सकता हैं!

4)
कचरा और अपशिष्ट
मैदानों में कचरे को खुला जला देने से हानिकारक डाइऑक्सिन, फ्युरान, मीथेन और ब्लैक कार्बन उत्सर्जित होते हैं तथा वायुमंडल में मिल जाते हैं। हमारे देश में 40% कचरा खुले में जलाया जाता हैं! शहरों और विकासशील देशों में यह समस्या बहुत ज्यादा गंभीर हैं! पृथक्करण और निपटान की प्रक्रिया द्वारा कचरे के मैदानों में जलाए जाने वाले कचरे की मात्रा कम की जा सकती है। जैविक कचरे को अलग कर उसे खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता हैं!

निष्कर्ष
मुस्कान एनजीओ की टीम यह बताना चाहती हैं कि उद्योगों से निकलने वाला धुँआ तो वायु को प्रदूषित करता ही हैं, परन्तु हम घरेलू प्रदूषक को कम करना चाहिए! आज कल प्रदूषण की समस्या बहुत बढ़ रही हैं, इसीलिए नजदीक ही कही जाने के लिए वाहनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए और कचरे को भी ऐसे ही खुले में नहीं जलाना चाहिए जो कचरा खाद के रूप में उपयोग करने के काम आता हैं, उसे खाद के रूप में उपयोग करना चाहिए! अगर आप भी इन सब में हमारा सहयोग दे तो जल्दी ही प्रदूषण को कम किया जा सकता हैं!